Electric Scooter Rules: सरकार ने बदला Low-Speed EV का नियम, क्या अब सड़कों पर बढ़ जाएगा खतरा?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Electric Scooter Rules: सरकार ने बदला Low-Speed EV का नियम, क्या अब सड़कों पर बढ़ जाएगा खतरा?

सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) ने इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए पावर लिमिट को **250W** से बढ़ाकर **600W** करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही **60 किलो** की वजन सीमा को भी खत्म करने की योजना है। इस फैसले पर इंडस्ट्री दो गुटों में बंट गई है।

बड़े बदलाव की तैयारी

21 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के जरिए सरकार सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में अहम बदलाव करना चाहती है। नए नियमों के तहत, अगर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की टॉप स्पीड 25 किमी/घंटा से कम रहती है, तो उन्हें रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे डिजाइन में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।

इंडस्ट्री में क्यों है बवाल?

इस कदम को लेकर इलेक्ट्रिक वाहन जगत दो हिस्सों में बंट गया है:

  • समर्थक गुट: BGauss जैसे मैन्युफैक्चरर्स का तर्क है कि पुरानी पाबंदियों के कारण डिजाइन पर असर पड़ रहा था। ज्यादा पावर और वजन की छूट मिलने से अब अधिक टिकाऊ और मजबूत स्कूटर बनाना आसान होगा, जो लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए भी बेहतर रहेंगे।

  • विरोध करने वाले: Yulu जैसे खिलाड़ियों ने वजन की लिमिट हटाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि इससे एक बड़ा रेगुलेटरी लूपहोल (Regulatory Loophole) पैदा हो जाएगा। डर यह है कि लोग खरीद के बाद स्कूटर में छेड़छाड़ कर उन्हें तेज रफ्तार हाई-स्पीड वाहनों में बदल सकते हैं, जिससे सड़क सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

मार्केट का भविष्य

भारत में लो-स्पीड EV का बाजार तेजी से फैल रहा है। अनुमान है कि यह सेल FY25 में 1.8-2.1 लाख यूनिट्स से बढ़कर FY27 तक 3.2-3.6 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकती है। अब सबकी निगाहें मंत्रालय के अंतिम फैसले पर हैं कि क्या वे सुरक्षा को लेकर कोई अतिरिक्त नियम लाते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.