EV कंपोनेंट्स में भारत में दबदबा बनाने की तैयारी
यह ज्वाइंट वेंचर (JV) सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका मुख्य मकसद नेक्स्ट-जेनरेशन EV पावरट्रेन टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करना और भारत के तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में Minda को एक लीडर के तौर पर स्थापित करना है। यूके की Turntide Drives, जो इलेक्ट्रिक मोटर्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की स्पेशलिस्ट है, के साथ इस साझेदारी से Minda को नई तकनीक मिलेगी।
Turntide की खास टेक्नोलॉजी का होगा इस्तेमाल
इस JV में Minda की सब्सिडियरी SMGM की 49% हिस्सेदारी होगी, जबकि Turntide Drives के पास 51% हिस्सेदारी रहेगी। दोनों मिलकर हाई-परफॉरमेंस मोटर कंट्रोलर्स, एक्शियल फ्लक्स मोटर्स और खास तरह के पंप्स का विकास और उत्पादन करेंगे। Turntide अपने पेटेंटेड एक्शियल फ्लक्स मोटर डिज़ाइन और एडवांस्ड सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) मोटर कंट्रोलर्स का योगदान देगी, जो मौजूदा सिस्टम्स की तुलना में कहीं ज़्यादा एफिशिएंट और पावरफुल हैं। यह टेक्नोलॉजी भारत के EV मार्केट की जटिल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए Minda के लिए बेहद अहम है। अनुमान है कि भारत में EV कंपोनेंट्स का पूरा मार्केट साल 2034 तक बढ़कर $18.6 बिलियन तक पहुंच सकता है। इस घोषणा के बाद, Minda Corporation के शेयर 13 अप्रैल 2026 को BSE पर 0.98% गिरकर ₹508.50 पर बंद हुए।
'Vision 2030' का अहम हिस्सा, वैल्यूएशन पर फोकस
यह JV Minda Corporation की 'Vision 2030' योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका लक्ष्य FY30 तक रेवेन्यू को ₹17,500 करोड़ तक पहुंचाना है। यह भारत के ऑटो सेक्टर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और लोकलाइज़ेशन की ओर बढ़ रहे रुझानों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 30% EV पेनिट्रेशन हासिल करना है। अप्रैल 2026 की शुरुआत तक, Minda Corporation का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹12,297 करोड़ था और P/E रेश्यो 42.75 के आसपास था। यह एक कॉम्पिटिटिव सेक्टर है, जहां Sona BLW Precision Forgings (P/E ~57.9x, Market Cap ~₹35,371 करोड़) और Varroc Engineering (P/E ~43.37x, Market Cap ~₹7,244 करोड़) जैसी कंपनियां भी EV कारोबार में उतर चुकी हैं। Minda का P/E रेश्यो बताता है कि निवेशक इस तरह के JV से भविष्य में भारी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
एग्जीक्यूशन रिस्क और बाज़ार की चुनौतियाँ
हालांकि, इस JV में कुछ एग्जीक्यूशन रिस्क भी हैं। Minda Corporation का Turntide की टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहना, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर या इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) प्रोटेक्शन से जुड़ी किसी भी समस्या को डेवलपमेंट में देरी कर सकता है। भारतीय EV कंपोनेंट मार्केट पहले से ही काफी कॉम्पिटिटिव है और इसमें भारी निवेश की ज़रूरत है। Minda जहां मज़बूत रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रख रही है, वहीं उसका प्रॉफिट ग्रोथ पिछले तीन सालों में औसतन लगभग 8.73% रहा है, जो कि थोड़ा धीमा है। कंपनी का 42.75 का P/E रेश्यो (कुछ हालिया रिपोर्टों में 54.25x से 60.88x तक) दिखाता है कि बाज़ार की उम्मीदें बहुत ज़्यादा हैं, जिससे ऑपरेशनल गलतियों की गुंजाइश कम रह जाती है। Minda को एडवांस्ड EV कंपोनेंट्स को एफिशिएंटली मैन्युफैक्चर करने की अपनी क्षमता साबित करनी होगी, जो कि बड़ी ग्लोबल कंपनियों के मुकाबले एक चुनौती है। ज़्यादातर एनालिस्ट 'Buy' की सलाह दे रहे हैं, लेकिन कुछ 'Hold' रेटिंग भी दे रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन तत्काल स्टॉक में बड़ी तेज़ी की गुंजाइश कम रखता है।
भविष्य का आउटलुक और आगे की रणनीति
Turntide के साथ यह पार्टनरशिप Minda Corporation की भारत के तेज़ी से विस्तार करते इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में अपनी मज़बूत जगह बनाने की महत्वाकांक्षा को साफ दर्शाती है। कंपनी की 'Vision 2030' आक्रामक रेवेन्यू लक्ष्य और फाइनेंशियल सुधारों की रूपरेखा तैयार करती है, जिसे लगातार निवेशों और हाई-वैल्यू EV कंपोनेंट्स पर फोकस से बल मिलेगा। एनालिस्ट्स का सेंटीमेंट ज़्यादातर सकारात्मक बना हुआ है, जिसमें कई 'Buy' रेटिंग्स और टारगेट प्राइस हैं जो आगे बढ़ने की संभावना जताते हैं, बशर्ते नई टेक्नोलॉजी सफलतापूर्वक इंटीग्रेट हो जाए और बाज़ार में उसे अपनाया जाए।