पश्चिमी एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन और महंगा हो गया है। ऐसे में, लोग अब ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जो भविष्य के लिए सुरक्षित हों और ईंधन की कीमतों के झटकों से बचा सकें। इसी वजह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) में लोगों की रुचि काफी बढ़ गई है। यह ऑटो सेक्टर के लिए एक अहम मोड़ है, लेकिन कुछ बड़ी संरचनात्मक चुनौतियाँ (Structural Challenges) बिक्री के विकास को सीमित कर सकती हैं।
बिक्री और बाजार का सेंटिमेंट
इस बढ़ती मांग के बीच, प्रमुख EV निर्माता कंपनियां अपने मार्केट शेयर को बढ़ाने में जुटी हैं। उदाहरण के लिए, Tata Motors ने मार्च 2026 तक 8,224 यूनिट्स की बिक्री की, जबकि Mahindra & Mahindra ने 141% की साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ दर्ज करते हुए 5,217 यूनिट्स बेचीं। बाजार का यह रुझान Nifty Auto Index पर भी दिखाई दे रहा है, जो 20 अप्रैल 2026 को 26,522.30 पर बंद हुआ। यह पिछले दिन के मुकाबले 0.33% ऊपर था और पिछले एक महीने में इसमें 7.31% की बढ़त देखी गई। यह तेजी इन ट्रेंड्स से प्रभावित सकारात्मक सेंटिमेंट को दर्शाती है।
टॉप प्लेयर्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा
भारत के EV बाजार में टॉप प्लेयर्स के बीच मुकाबला और कड़ा होता जा रहा है। मार्केट लीडर Tata Motors का फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में मार्केट शेयर घटकर 39.2% रह गया, जो FY25 में 53.4% था। वहीं, Mahindra & Mahindra ने तेजी से अपना शेयर बढ़ाकर FY26 में 21.2% कर लिया, जबकि FY25 में यह सिर्फ 7.8% था। JSW MG Motor ने FY26 में मार्केट का 26.4% हिस्सा अपने नाम किया। कुल मिलाकर, ये तीन कंपनियाँ पैसेंजर EV मार्केट के लगभग 87% हिस्से पर हावी हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लागत की चुनौतियाँ
बिक्री में वृद्धि के बावजूद, कई बुनियादी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एक बड़ी अड़चन है। 2025 के अंत तक, देश में लगभग 39,500 पब्लिक चार्जर्स थे, जो लगभग हर 225 EV पर एक चार्जर के हिसाब से है, यह वैश्विक मानकों से काफी कम है। कई चार्जिंग स्टेशन 25% से भी कम इस्तेमाल हो रहे हैं, जो निवेश की व्यवहार्यता को प्रभावित कर रहा है। EV अपनाने के लिए ज़रूरी होम चार्जिंग की सुविधा भी सीमित है, जो केवल लगभग 55% EV मालिकों के लिए उपलब्ध है। साथ ही, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की शुरुआती कीमत (Upfront Cost) अभी भी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल (ICE) गाड़ियों की तुलना में ज़्यादा है, जो खरीदारों को रोक रही है। रेंज एंग्जायटी (Range Anxiety) भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है, खासकर बड़े शहरों के बाहर और छोटे शहरों में।
भविष्य की उम्मीदें: इंफ्रास्ट्रक्चर है चाबी
सरकार FAME II (जो मार्च 2024 में समाप्त हुआ) और नए PM E-DRIVE (जो अप्रैल 2024 में शुरू हुआ) जैसी योजनाओं के ज़रिए इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। लेकिन सब्सिडी पर निर्भरता और योजनाओं के बीच बदलाव अभी भी चुनौतियाँ पेश कर रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत का EV बाजार 2035 तक 50% से ज़्यादा की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ तेजी से बढ़ेगा, और यह बाजार 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का हो सकता है। उम्मीद है कि 2027 तक EVs नई गाड़ियों की कुल बिक्री का 10-15% हिस्सा बन जाएंगी। सरकार की प्रतिबद्धता, जिसमें PM E-DRIVE जैसी पहलें और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंडिंग शामिल है, इस ग्रोथ का समर्थन करती है। हालांकि, व्यापक रूप से अपनाने (Widespread Adoption) को सुनिश्चित करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की गति को EV की बढ़ती बिक्री की रफ़्तार से मिलाना सबसे बड़ी चुनौती होगी, जिसकी बिक्री 2025 में 2.3 मिलियन यूनिट्स से अधिक हो गई थी।
