फ्रेंच टायर कंपनी Michelin ने चेन्नई प्लांट में पैसेंजर कार के प्रीमियम टायर्स का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। इस कदम से कंपनी भारत के बढ़ते प्रीमियम व्हीकल मार्केट की मांग को पूरा करेगी और साथ ही उत्तरी अमेरिका व यूरोप जैसे क्षेत्रों में एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा देगी। इस खास प्रोडक्शन लाइन के लिए लगभग ₹686 करोड़ के निवेश के बाद प्लांट अब 16 से 22 इंच तक के टायर्स बना रहा है।
चेन्नई में Michelin की नई शुरुआत
फ्रांस की दिग्गज टायर निर्माता कंपनी Michelin ने अपने चेन्नई स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में पैसेंजर कार टायर्स का लोकल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। यह एक स्ट्रेटेजिक मूव है जिसका मकसद भारत में प्रीमियम गाड़ियों की बढ़ती मांग को पूरा करना है। आजकल भारतीय ग्राहक बड़े SUVs की ओर बढ़ रहे हैं, जिन्हें हाई-परफॉरमेंस टायर्स की जरूरत होती है। लोकल प्रोडक्शन से कंपनी अपने ग्राहकों के करीब आ जाएगी और भारतीय प्लांट को ग्लोबल हब के तौर पर भी इस्तेमाल कर पाएगी।
निवेश और ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी
टायर्स के लोकल प्रोडक्शन का यह फैसला कंपनी ने करीब 18 महीने पहले लिया था। Michelin ने इस पैसेंजर कार टायर प्रोडक्शन लाइन को स्थापित करने के लिए लगभग ₹686 करोड़ (करीब €76 मिलियन) का निवेश किया है। यह निवेश 2009 में कंपनी द्वारा चेन्नई प्लांट में किए गए शुरुआती ₹2,800 करोड़ के निवेश के अतिरिक्त है। पिछले साल भर की इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग फेज के बाद, जून में एक्सपैंडेड प्लांट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो गया था।
कंपनी के अनुसार, चेन्नई प्लांट में वही मशीनरी, रॉ मैटेरियल्स और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं जो Michelin के दूसरे ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग साइट्स पर होते हैं। मैनेजमेंट ने यह भी साफ किया है कि शुरुआत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग का खर्च थोड़ा ज्यादा हो सकता है, लेकिन कंज्यूमर प्राइसिंग प्रोडक्ट की वैल्यू पर आधारित होगी, न कि प्रोडक्शन लोकेशन पर। यहां 16 से 22 इंच तक के प्रीमियम टायर्स बनाए जा रहे हैं, जिनकी रिटेल कीमत साइज के हिसाब से ₹10,000 से शुरू होती है।
मार्केट फोकस और एक्सपोर्ट की प्लानिंग
शुरुआत में, कंपनी का फोकस भारत के प्रीमियम रिप्लेसमेंट मार्केट पर रहेगा। जैसे-जैसे प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ेगी, ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) को सप्लाई करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने की योजना है। यह प्लांट पश्चिम एशिया, अफ्रीका, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों की ओवरसीज डिमांड को भी पूरा करेगा। डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों मार्केट पर यह फोकस कंपनी के ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत को इंटीग्रेट करने के बड़े प्रयास का हिस्सा है।
हालांकि, इस एक्सपेंशन से Michelin का प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस दिख रहा है, लेकिन ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर के सामान्य जोखिम भी मौजूद हैं। इनमें रबर और क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स जैसे रॉ मैटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शामिल है। इसके अलावा, लोकल प्रोडक्शन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कितनी प्रभावी ढंग से ऑपरेशंस को स्केल कर पाती है और डोमेस्टिक व ग्लोबल मार्केट में डिमांड की वोलेटिलिटी को मैनेज कर पाती है। इन्वेस्टर्स प्रोडक्शन रैंप-अप, OEMs को सप्लाई की ओर शिफ्ट और ग्लोबल सप्लाई चेन में संभावित बदलावों के बीच मार्जिन प्रेशर को मैनेज करने के तरीके पर नजर रख सकते हैं। प्रोडक्शन वॉल्यूम में ग्रोथ और नए लोकल मैन्युफैक्चर्ड रेंज को सपोर्ट करने के लिए डीलर नेटवर्क का विस्तार, अगली बड़ी अपडेट्स होंगी जिन पर नज़र रखनी होगी।
