दिग्गज टायर मेकर Michelin अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भारत को एक बड़े सोर्सिंग हब के रूप में देख रही है। कंपनी रबर और कार्बन ब्लैक जैसे कच्चे माल की खरीद अब भारतीय बाजार से करने की तैयारी में है।
फ्रेंच टायर कंपनी Michelin ने अपनी सप्लाई चेन स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव करते हुए भारत को कच्चे माल के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में चुनना शुरू किया है। कंपनी अब नेचुरल रबर, कार्बन ब्लैक, स्टील और पेट्रोकेमिकल्स के लिए भारतीय सप्लायर्स के साथ जुड़कर अपनी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग को और अधिक मजबूती देना चाहती है।
AIM क्लस्टर में ग्रोथ की उम्मीद
Michelin ने अफ्रीका, इंडिया और मिडिल ईस्ट (AIM) क्लस्टर को भविष्य की ग्रोथ के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना है। जहाँ अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में मांग सुस्त है, वहीं कंपनी को AIM रीजन में डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। भारत इस रणनीति के केंद्र में है, जहाँ कंपनी लोकल स्टार्टअप्स के साथ मिलकर रबर प्लांटेशन और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
चेन्नई फैसिलिटी की स्थिति
कंपनी का चेन्नई प्लांट इस रणनीति का मुख्य आधार है। इस प्लांट की मौजूदा क्षमता 54,000 टन सालाना है। वर्तमान में यहाँ से 30% से 40% उत्पादन का निर्यात नॉर्थ अमेरिका, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्लांट अभी अपनी पूरी क्षमता (Full capacity) पर काम नहीं कर रहा है, जिसका मतलब है कि बिना बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट के भी प्रोडक्शन बढ़ाया जा सकता है।
मार्जिन पर दबाव और जोखिम
ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कंपनी मार्जिन के दबाव से जूझ रही है। कच्चे माल जैसे रबर और क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स की बढ़ती लागत को देखते हुए, कंपनी ने पिछले छह महीनों में कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी कैसे अपनी लागत को कंट्रोल करती है और भारत से रॉ मटेरियल सोर्सिंग करके ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशन से खुद को कितना बचा पाती है।
