साल 2026 की पहली छमाही में भारतीय लग्जरी कार बाज़ार में Mercedes-Benz ने अपना दबदबा कायम रखा है। कंपनी ने **9,768** यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप स्पॉट हासिल किया है, जबकि प्रतिद्वंद्वी BMW भी पीछे नहीं है। Mercedes जहां हाई-मार्जिन वाली लग्जरी गाड़ियों पर फोकस कर रही है, वहीं BMW ने **17%** की जोरदार ग्रोथ दर्ज की है।
भारत में लग्जरी कार की रेस
साल 2026 की पहली छमाही में भारत में लग्जरी कार सेगमेंट में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। Mercedes-Benz ने अपने अब तक के सबसे बेहतरीन हाफ-ईयरली सेल्स के आंकड़े पेश करते हुए 9,768 यूनिट्स बेचीं। कंपनी की यह सफलता एंट्री-लेवल सेडान और टॉप-टियर लग्जरी मॉडल्स, दोनों की ज़बरदस्त डिमांड के कारण रही। वहीं, अप्रैल-जून की तिमाही में Mercedes-Benz ने 4,637 गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 10% ज़्यादा हैं।
BMW की तूफानी ग्रोथ
BMW Group India ने भी इसी अवधि में रिकॉर्ड 9,075 यूनिट्स की डिलीवरी की है। हालांकि, Mercedes-Benz से करीब 700 यूनिट्स पीछे रहने के बावजूद, BMW ने 17% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ रेट हासिल की है, जो बाज़ार में तेज़ी से विस्तार का संकेत देता है। BMW ने आने वाले समय के लिए आक्रामक रणनीति बनाई है, जिसके तहत साल 2026 में 14 नए या रीफ्रेश मॉडल्स लॉन्च करने की योजना है। बता दें कि लग्जरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में BMW की 69% मार्केट शेयर के साथ मज़बूत पकड़ है।
हाई-वैल्यू मॉडल्स पर फोकस
दोनों ही कार निर्माता कंपनियां रेवेन्यू बढ़ाने के लिए हाई-वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स पर ज़ोर दे रही हैं। Mercedes-Benz ने अपने अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट, खासकर ₹1.4 करोड़ से ऊपर की गाड़ियों की बिक्री में 20% से ज़्यादा की ग्रोथ देखी है। ये हाई-एंड मॉडल्स अब भारत में कंपनी की कुल बिक्री का 28% हिस्सा हैं। इतना ही नहीं, Mercedes-AMG परफॉरमेंस डिवीजन की डिमांड में 50% का उछाल आया है। टॉप-एंड कैटेगरी में बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का शामिल होना भी रेवेन्यू बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
बाज़ार का भविष्य और निवेशकों के लिए अहम बातें
भारतीय लग्जरी ऑटोमोटिव सेक्टर लगातार ग्रोथ कर रहा है। साल 2031 तक इस सेक्टर का मार्केट वैल्यूएशन करीब $1.92 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो अभी लगभग $1.5 बिलियन है। इस ग्रोथ की बड़ी वजह देश में हाई-नेट-वर्थ वाले परिवारों की बढ़ती संख्या है। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां किस तरह हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स और एंट्री-लेवल सेगमेंट के बीच संतुलन बनाती हैं। जहां एक ओर महंगी गाड़ियां प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाती हैं, वहीं एंट्री-लेवल सेगमेंट युवा खरीदारों को आकर्षित करने के लिए ज़रूरी है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या इन कंपनियों की आक्रामक प्रोडक्ट लॉन्च स्ट्रेटेजी, मैक्रोइकॉनॉमिक्स की अनिश्चितताओं के बीच वॉल्यूम ग्रोथ बनाए रख पाती है या नहीं। सप्लाई चेन मैनेजमेंट और लग्जरी EVs की डिमांड भी महत्वपूर्ण फैक्टर रहेंगे।
