प्रीमियम फोकस से सेल्स में आई तेज़ी
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 मर्सिडीज़-बेंज इंडिया के लिए शानदार रहा। कंपनी ने कुल 19,363 यूनिट्स की रिटेल बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल से 2.3% अधिक है। इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय कंपनी के टॉप-एंड लग्जरी सेगमेंट को जाता है, जिसकी बिक्री में 16% का इज़ाफ़ा हुआ है। अब यह सेगमेंट कुल बिक्री का 27% हिस्सा रखता है। यह दर्शाता है कि कंपनी एंट्री-लेवल कारों की घटती मांग के बजाय, ज़्यादा मार्जिन और ब्रांड एक्सक्लूसिविटी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में भी कंपनी की बिक्री 7% बढ़कर 5,131 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो बदलते बाजार में कंपनी की मजबूती को दिखाता है।
अल्ट्रा-लक्जरी और EVs की ज़बरदस्त डिमांड
मर्सिडीज़-बेंज इंडिया की अल्ट्रा-लक्जरी और हाई-परफॉरमेंस कारों पर फोकस करने की रणनीति रंग ला रही है। एस-क्लास, मेबैक रेंज और एएमजी परफॉरमेंस वेरिएंट जैसे फ्लैगशिप मॉडल्स की डिमांड इतनी ज़बरदस्त है कि AMG G63 जैसे मॉडल्स के लिए 12 महीने तक का वेटिंग पीरियड चल रहा है। ग्राहकों की एक्सक्लूसिव और हाई-क्वालिटी गाड़ियों की चाहत टॉप-एंड सेगमेंट के इस ग्रोथ को बढ़ा रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEVs) भी इस हाई-एंड टियर में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, जो टॉप-एंड बिक्री का 20% हिस्सा बन गए हैं। ₹1.4 करोड़ से ऊपर की BEVs में 85% की ग्रोथ देखी गई, जिसमें EQS SUV जैसे मॉडल्स का बड़ा योगदान रहा।
वहीं, सी-क्लास, लॉन्ग-व्हीलबेस ई-क्लास, जीएलसी और जीएलई जैसे कोर लाइनअप की बिक्री स्थिर वॉल्यूम प्रदान कर रही है, और लॉन्ग-व्हीलबेस ई-क्लास भारत की सबसे ज़्यादा बिकने वाली लग्जरी कार बनी हुई है। हालांकि, एंट्री लग्जरी सेगमेंट में 18% की गिरावट आई है, जिसे मर्सिडीज़-बेंज इंडिया जानबूझकर कम कर रही है ताकि ज़्यादा वैल्यू वाले व्हीकल्स पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
लग्जरी कार मार्केट में ट्रेंड्स और कॉम्पिटिशन
मर्सिडीज़-बेंज इंडिया अपनी लीडिंग पोजीशन को ज़्यादा मार्जिन वाले सेगमेंट पर फोकस करके बनाए हुए है। कंपनी की औसत सेलिंग प्राइस (Average Selling Price) कोविड से पहले ₹57 लाख से बढ़कर ₹89 लाख हो गई है, जो प्रीमियम फोकस की सफलता को साबित करता है। भारत का लग्जरी कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसका मूल्य USD 1.26 बिलियन से USD 4 बिलियन के बीच है और 2034 तक USD 1.98 बिलियन से USD 9.19 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। एसयूवी (SUVs) कुल बिक्री का लगभग 57% हिस्सा रखती हैं।
प्रतिद्वंद्वियों की बात करें तो, बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया ने CY2025 में 18,001 यूनिट्स की बिक्री के साथ अपना हाईएस्ट एनुअल सेल्स दर्ज किया, जो 14% की ग्रोथ है। बीएमडब्ल्यू भी प्रीमियम मॉडल्स पर फोकस कर रही है, जहां लॉन्ग-व्हीलबेस कारें 50% और एसयूवी (SAVs) 60% बिक्री का हिस्सा हैं। बीएमडब्ल्यू ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर आक्रामक तरीके से काम किया, जिनकी बिक्री 2025 में 200% बढ़ी। इसके विपरीत, ऑडी इंडिया की FY2026 में बिक्री 39.8% गिरी, जबकि जगुआर लैंड रोवर (JLR) इंडिया FY2025 में 40% और FY2026 में 6.5% बढ़ी, जिसमें डिफेंडर और रेंज रोवर जैसे मॉडल्स आगे रहे।
मर्सिडीज़-बेंज इंडिया के लिए बने हुए जोखिम
अपनी लीडरशिप के बावजूद, मर्सिडीज़-बेंज इंडिया कुछ जोखिमों का सामना कर रही है। एंट्री-लेवल सेगमेंट से बाहर निकलने से मार्केट शेयर खोने का खतरा है, खासकर अगर आर्थिक मंदी आती है या प्रतिद्वंद्वी इस सेगमेंट में मज़बूत होते हैं। ऑडी इंडिया की मुश्किलों से इस प्राइस-सेंसिटिव मार्केट का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। हालांकि EV की डिमांड बढ़ रही है, पर लग्जरी मार्केट में अभी भी इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) कारें हावी हैं (FY2026 में लगभग 86%), जिसका मतलब है कि इस ट्रांजिशन के दौरान दोनों टेक्नोलॉजी पर ध्यान देना होगा। बीएमडब्ल्यू का मजबूत EV पुश और मार्केट में बढ़त, खासकर Q4 FY2026 में सेल्स में मर्सिडीज़-बेंज को पीछे छोड़ना, EV लीडरशिप के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है। मर्सिडीज़-बेंज ग्रुप AG का वैल्यूएशन, जो ऐतिहासिक P/E एवरेज से ऊपर चल रहा है, ग्रोथ उम्मीदों पर खरा न उतरने पर वल्नरेबिलिटी (vulnerability) का संकेत देता है। 2026 में 20 से ज़्यादा नए लग्जरी आउटलेट्स की योजनाएं एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) के साथ आती हैं और इनमें बड़े निवेश की ज़रूरत होगी।
ग्रोथ की रणनीति और बाजार का अनुमान
मर्सिडीज़-बेंज इंडिया 2026 में 20 से ज़्यादा नए लग्जरी आउटलेट्स खोलकर और फ्रेंचाइज़ पार्टनर्स से ₹450 करोड़ से ज़्यादा का निवेश प्राप्त करके लगातार ग्रोथ की योजना बना रही है। कंपनी अपनी प्रोडक्ट रेंज, खासकर परफॉरमेंस व्हीकल्स में, विस्तार करने की भी योजना बना रही है ताकि नई डिमांड को पूरा किया जा सके। इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, भारत के लग्जरी कार मार्केट में 5% से लेकर 10% से ज़्यादा की एनुअल ग्रोथ रेट (CAGRs) 2034 तक जारी रहने की उम्मीद है। यह बढ़ती आय, शहरीकरण और प्रीमियम, पर्सनलाइज्ड कारों की मांग से प्रेरित है। एसयूवी और ईवी की ओर बढ़ता रुझान, और लॉन्ग-व्हीलबेस सेडान जैसी हाई-स्पेक, कंफर्टेबल कारों की मांग, प्रतिस्पर्धा को आकार देगी। मर्सिडीज़-बेंज इंडिया की 'वैल्यू-लेड ग्रोथ' (value-led growth) की रणनीति, हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट्स और कस्टमर की इच्छाओं पर फोकस करती है, जो इन मार्केट शिफ्ट्स के लिए काफी उपयुक्त नज़र आती है।