Mercedes-Benz ने भारत में अपनी नई इलेक्ट्रिक एसयूवी G580 EQ को ₹3.1 करोड़ की एक्स-शोरूम कीमत पर लॉन्च कर दिया है। यह नई गाड़ी अपनी दमदार ऑफ-रोड डिज़ाइन के साथ लेटेस्ट इलेक्ट्रिक तकनीक का संगम है, जो कंपनी की ग्लोबल इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बिक्री बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
आइकॉनिक डिज़ाइन में इलेक्ट्रिक पावर
Mercedes-Benz ने भारत में G580 विद EQ टेक्नोलॉजी को पेश किया है, जिसने लग्जरी इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में एंट्री मारी है। इस एसयूवी की कीमत ₹3.1 करोड़ (एक्स-शोरूम) रखी गई है। सबसे खास बात यह है कि यह अपनी पुरानी, दमदार G-Wagon वाली पहचान को बरकरार रखती है, जो कंपनी की अपने हेरिटेज को बनाए रखते हुए इलेक्ट्रिक पावरट्रेन की ओर बढ़ने की कोशिश को दर्शाता है।
दमदार परफॉरमेंस और खास फीचर्स
तकनीकी तौर पर, इस गाड़ी में चार अलग-अलग इलेक्ट्रिक मोटर्स लगे हैं, हर व्हील के लिए एक। ये मिलकर 587 हॉर्सपावर की ताकत और 1,164 न्यूटन-मीटर का टॉर्क जेनरेट करते हैं। इसके अलावा, इसमें 'G-Turn' फीचर भी है, जिससे गाड़ी अपने ही एक्सिस पर घूम सकती है, और 'ट्रांसपेरेंट बोनट' कैमरा सिस्टम जैसे फीचर्स इसे ऑफ-रोडिंग के लिए खास बनाते हैं। कंपनी की यह स्ट्रेटेजी है कि अपने हाई-मार्जिन मॉडल्स को इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए, ताकि ब्रांड की पहचान को बरकरार रखते हुए उसे आगे बढ़ाया जा सके।
ग्लोबल स्ट्रेटेजी और चुनौतियां
जहां यह लॉन्च भारत में लग्जरी सेगमेंट को टारगेट कर रहा है, वहीं यह Mercedes-Benz Group AG की ग्लोबल स्ट्रेटेजी को भी दिखाता है। कंपनी का लक्ष्य 2026 तक अपनी कुल ग्लोबल बिक्री में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी 23-25% तक बढ़ाना है। हालांकि, बिजनेस का माहौल अभी भी थोड़ा मिला-जुला है। कंपनी ने दूसरी तिमाही 2026 में ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 22% की बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन साथ ही उसने अपनी पूरे साल की कार बिक्री का अनुमान भी घटा दिया है। यह कदम चीन जैसे प्रमुख लग्जरी कार बाजारों में मांग में कमी को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
लग्जरी ऑटो सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, यह लॉन्च एक केस स्टडी की तरह है कि कैसे कार निर्माता इस बदलाव को मैनेज कर रहे हैं। लग्जरी सेगमेंट में पुराने प्रतिद्वंद्वियों और नए इलेक्ट्रिक प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। G580 EQ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन हाई-टिकट इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं के बावजूद कितनी मजबूत रहती है।
निवेशक इस बात पर गौर कर सकते हैं कि कंपनी अपनी महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिफिकेशन टारगेट्स को चीन और यूरोप जैसे बाजारों की घटती मांग के साथ कैसे संतुलित करती है। साथ ही, प्रीमियम EV स्पेस में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ब्रांड अपनी प्राइसिंग पावर को कितना बनाए रख पाता है, यह प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए महत्वपूर्ण होगा। कंपनी की सालाना इलेक्ट्रिक व्हीकल बिक्री टारगेट्स की ओर प्रगति और बाजार की स्थिति के अनुसार सेल्स गाइडेंस में कोई और बदलाव, आगे ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
