भारत में लग्जरी कारों की बढ़ती मांग को देखते हुए Mercedes-Benz और BMW ने अब अपनी ग्लोबल और इंडियन लॉन्चिंग के बीच के फासले को घटाकर **4-6 महीने** कर दिया है। हालांकि, कंपनियां सेल्स के नए रिकॉर्ड बना रही हैं, लेकिन सप्लाई चेन की दिक्कतें और बढ़ती लागत ने कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।
भारत में लग्जरी कारों के लिए ग्राहकों का नजरिया तेजी से बदल रहा है। पहले जहां ग्लोबल मॉडल्स के भारत आने में 1 साल तक का समय लग जाता था, वहीं अब लग्जरी ऑटोमेकर्स ने इस समय सीमा को घटाकर महज 4 से 6 महीने कर दिया है।
सेल्स के नए रिकॉर्ड्स
Mercedes-Benz India ने साल 2026 के पहले 9 महीनों में 15,190 यूनिट्स की बिक्री की है, जो पिछले साल के मुकाबले 8% अधिक है। तीसरी तिमाही में कंपनी ने 5,422 यूनिट्स बेचकर रिकॉर्ड बनाया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 6% और दूसरी तिमाही के मुकाबले 17% की ग्रोथ है।
उधर, BMW Group India की ग्रोथ भी शानदार रही है। कंपनी ने साल 2026 की पहली छमाही में 9,075 यूनिट्स बेची हैं, जो 17% का उछाल है। खास बात यह है कि BMW की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) का हिस्सा 26% रहा, जिसके साल की दूसरी छमाही में 30% तक पहुंचने का अनुमान है। Mercedes-Benz CLA Electric जैसे मॉडल्स को लेकर बाजार में जबरदस्त क्रेज है, जिसके 1,000 से ज्यादा ऑर्डर्स के कारण डिलीवरी मार्च 2027 तक पहुंच गई है।
सप्लाई और कॉस्ट का दबाव
बाजार में मांग तो है, लेकिन कंपनियां सप्लाई चेन की चुनौतियों से जूझ रही हैं, जिससे हाई-डिमांड मॉडल्स की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, करेंसी में उतार-चढ़ाव और शिपिंग लागत बढ़ने के कारण ऑटोमेकर्स को अक्टूबर में कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। हालांकि लग्जरी सेगमेंट अब तक इन प्राइस हाइक के प्रति लचीला रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें और मार्केट की अस्थिरता आने वाले समय में कंज्यूमर सेंटीमेंट पर असर डाल सकती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनियां अपनी सप्लाई चेन की समस्याओं को सुलझाकर ऑर्डर्स का बैकलॉग पूरा कर पाएंगी या नहीं।
