मेघालय सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026 का ऐलान कर दिया है। इस नई पॉलिसी के तहत, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सीधे **₹25,000** की सब्सिडी मिलेगी और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ कर दी जाएगी। इसका मकसद क्लीन मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।
Detailed Coverage
मेघालय कैबिनेट ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद लागत कम होगी। इस पॉलिसी के तहत, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के खरीदारों को सीधे ₹25,000 का कैश इंसेंटिव मिलेगा। साथ ही, एलिजिबल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए रजिस्ट्रेशन फीस भी पूरी तरह माफ कर दी गई है।
यह पहल राज्य में पहले से चल रहे 5,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों के बेस को और मजबूत करेगी। सरकार पुरानी, ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को बदलने के लिए इस वित्तीय सहायता को पहले से नोटिफाइड व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी के साथ जोड़ रही है। जो लोग 15 साल से पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करेंगे, वे इन नए EV इंसेंटिव का फायदा उठा सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रिड की तैयारी
इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का मजबूत होना बहुत ज़रूरी है। राज्य सरकार ने कमर्शियल चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए ज़मीन की पहचान कर ली है। इन साइट्स को पहले से तय करके, सरकार पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क स्थापित करने में लगने वाले समय और रेगुलेटरी देरी को कम करना चाहती है।
साथ ही, सरकार इस बदलाव के लिए ज़रूरी बिजली की ज़रूरतों को भी पूरा कर रही है। कैबिनेट ने ₹22.37 करोड़ मंजूर किए हैं, जो 6.5 किलोमीटर लंबी 132 KV ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे। यह प्रोजेक्ट एक नए सबस्टेशन को मौजूदा ग्रिड से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। EV चार्जिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य के पावर नेटवर्क पर पड़ने वाले अतिरिक्त लोड को संभालने हेतु भरोसेमंद बिजली वितरण ज़रूरी है।
मैनेजमेंट और गवर्नेंस में बदलाव
इन एनर्जी पहलों की टेक्निकल देखरेख के लिए, राज्य ने मेघालय एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड के रिटायर चीफ इंजीनियर B.M. War को जनरेशन के लिए चीफ टेक्निकल एडवाइजर नियुक्त किया है। उनकी भूमिका राज्य की पावर जनरेशन स्ट्रेटेजी को बेहतर बनाने और निगरानी करने की होगी।
निवेशकों के लिए, आने वाले तिमाहियों में चार्जिंग स्टेशनों की कमीशनिंग की रफ़्तार और EV रजिस्ट्रेशन में असल बढ़ोतरी पर नज़र रखनी होगी। हालांकि इंसेंटिव से मांग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति और लोकल पावर ग्रिड की ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर इसका लॉन्ग-टर्म असर महत्वपूर्ण रहेगा। नए पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स और चार्जिंग पॉइंट्स के रोलआउट के बीच तालमेल ही तय करेगा कि आने वाले सालों में राज्य बढ़े हुए पावर लोड को कितनी आसानी से मैनेज कर पाता है।
