ASEAN देशों से मेडिकल डिवाइस का आयात पिछले साल करीब ₹13,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जिससे भारतीय निर्माताओं पर भारी कीमत का दबाव बन रहा है। चीन से सस्ते आयात के इस खेल ने सरकारी स्कीमों के बावजूद स्थानीय उत्पादन की वित्तीय स्थिति को खतरे में डाल दिया है।
सस्ते आयात से भारतीय कंपनियों की मुश्किल
भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग इस समय सस्ते आयात के बढ़ते दबाव से जूझ रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में ASEAN देशों से मेडिकल डिवाइस का आयात 14% बढ़कर लगभग ₹13,000 करोड़ तक पहुंच गया। यह ट्रेंड उन घरेलू कंपनियों के लिए चिंता का सबब है जिन्होंने सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी स्कीमों के तहत अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाई है।
डायलिसिस और इमेजिंग सेगमेंट पर असर
खासकर डायलिसिस इक्विपमेंट, सिरिंज और इमेजिंग डिवाइस जैसे सेगमेंट में कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। उदाहरण के लिए, मलेशिया और चीन से आने वाले डायलाइजर का आयात पिछले दो सालों में दोगुना होकर ₹256 करोड़ हो गया है। पॉली मेडिक्योर (Poly Medicure) जैसी कंपनियों के लीडर्स का कहना है कि उनके पास हाई-क्वालिटी मेडिकल उपकरण बनाने की तकनीकी क्षमता तो है, लेकिन वे उन उत्पादों की कृत्रिम रूप से कम की गई कीमतों से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं, जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का फायदा उठाने के लिए रूट बदले जाने की आशंका है। इस प्राइसिंग के अंतर के कारण कंपनियां स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने में लगे कैपिटल को वसूल नहीं कर पा रही हैं।
डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौतियां
कीमतों की लड़ाई के अलावा, मैन्युफैक्चरर्स को कॉम्प्लेक्स इमेजिंग इक्विपमेंट की सप्लाई चेन में भी स्ट्रक्चरल बाधाएं आ रही हैं। ऑलेंजर्स मेडिकल सिस्टम्स (Allengers Medical Systems) ने बताया है कि एक्स-रे ट्यूब और फ्लैट-पैनल डिटेक्टर जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए वे अभी भी बड़े पैमाने पर, खासकर चीन से आयात पर निर्भर हैं। इस निर्भरता के चलते घरेलू कंपनियां पूरी तरह से स्वदेशी उत्पादन हासिल करने में संघर्ष कर रही हैं। इसी तरह, सर्जिकल ग्लव्स जैसे कंज्यूमेबल बनाने वाली कंपनियां भी बता रही हैं कि मौजूदा इंपोर्ट-हेवी माहौल में सरकारी टेंडर जीतना मुश्किल है, क्योंकि टेंडर में अक्सर गुड्स की ओरिजिन की परवाह किए बिना सबसे कम बोली को प्राथमिकता दी जाती है।
रेगुलेटरी और ट्रेड कंसर्न्स
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) ने चिंता जताई है कि ASEAN फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की मौजूदा संरचना, जो जीरो-टैरिफ इंपोर्ट की अनुमति देती है, लोकल मेडटेक मैन्युफैक्चरिंग के विकास को कमजोर कर रही है। इंडस्ट्री अब कड़े ट्रेड रेगुलेशंस और मौजूदा टैरिफ में संशोधन की मांग कर रही है ताकि एक लेवल प्लेइंग फील्ड मिल सके। मलेशिया से डायलाइजर पर हाल ही में शुरू की गई एंटी-डंपिंग जांच से कुछ राहत मिली है, लेकिन इंडस्ट्री को अन्य क्षेत्रों से री-रूट किए गए आयात के व्यापक जोखिम की चिंता बनी हुई है।
निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि सरकार इन ट्रेड प्रोटेक्शन की मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या मौजूदा एंटी-डंपिंग उपाय सस्ते गुड्स के इनफ्लो को प्रभावी ढंग से रोक पाते हैं। इसके अलावा, आने वाली तिमाहियों में घरेलू निर्माताओं के फाइनेंशियल परफॉरमेंस से यह पता चलेगा कि क्या वे लगातार आयात दबाव के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख सकते हैं और अपने नियोजित कैपिटल खर्च को जारी रख सकते हैं।
