फाइनेंशियल ईयर 2026 में, भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki का मार्केट शेयर लुढ़ककर 39.26% पर आ गया है। यह 13 साल का सबसे निचला स्तर है। इसकी वजह है पैसेंजर व्हीकल मार्केट में SUV सेगमेंट का लगातार बढ़ता दबदबा। आज यह सेगमेंट मार्केट का 67% हिस्सा बन चुका है, लेकिन Maruti Suzuki की पकड़ इस बड़े सेगमेंट में 25% से भी कम है। जबकि, कंपनी कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट में 67% की मजबूत पकड़ रखती है, लेकिन इस सेगमेंट में ग्रोथ धीमी है।
इस बड़े बदलाव का सीधा फायदा Mahindra & Mahindra (M&M) और Tata Motors जैसी कंपनियों को हुआ है। M&M ने अपनी Thar और Scorpio जैसी पॉपुलर SUVs की बदौलत FY26 तक अपना मार्केट शेयर दोगुना से ज़्यादा बढ़ाकर 14.21% कर लिया है और दूसरी सबसे बड़ी ऑटो कंपनी बन गई है। Tata Motors भी Nexon और Punch जैसी कारों के साथ 13% शेयर रखती है और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट में लीड कर रही है। Hyundai चौथे स्थान पर खिसक गई है।
Maruti Suzuki ने Jimny और Grand Vitara जैसे नए मॉडल लॉन्च किए, लेकिन वह SUV मार्केट में अपनी पैठ बनाने में उतनी सफल नहीं हो पाई। एक बड़ी वजह यह भी है कि कंपनी के पास डीजल इंजन का ऑप्शन नहीं है, जबकि अभी भी मार्केट का करीब 20% हिस्सा डीजल कारों का है। कंपनी के प्रीमियम मॉडल, जैसे Invicto, Toyota की Innova Hycross के मुकाबले संघर्ष कर रहे हैं। Innova Hycross पहले ही 2,00,000 से ज़्यादा यूनिट्स बेच चुकी है।
इन सबके बीच, Maruti Suzuki का FY31 तक 50% मार्केट शेयर वापस पाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य पाना मुश्किल नज़र आ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी को अगले पांच सालों में लगभग 12% मार्केट शेयर हासिल करना होगा, जो कि काफी चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, ब्रोकरेज हाउसेज अभी भी कंपनी के स्टॉक को लेकर पॉजिटिव हैं और 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस दे रहे हैं, जो कंपनी की क्षमता को दर्शाता है।
कंपनी BEVs, Hybrids और Biofuels जैसी भविष्य की टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है और FY31 तक अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को 40 लाख यूनिट तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। लेकिन SUV सेगमेंट में बढ़ती पैठ और प्रीमियम कार मार्केट में पकड़ मजबूत बनाना कंपनी के लिए एक लंबी और कठिन लड़ाई होगी।