Maruti Suzuki: BS-VII नियमों पर सरकार से नरमी की मांग, गाड़ियों के दाम बढ़ने का है डर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Maruti Suzuki: BS-VII नियमों पर सरकार से नरमी की मांग, गाड़ियों के दाम बढ़ने का है डर

Maruti Suzuki और SIAM ने सरकार से आगामी BS-VII एमिशन नॉर्म्स की **2029** की डेडलाइन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। ऑटो सेक्टर को डर है कि नए सख्त नियमों से गाड़ियों की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं, जिसका असर सीधा कंज्यूमर पर पड़ेगा।

Maruti Suzuki India ने सरकार द्वारा प्रस्तावित Bharat Stage-VII (BS-VII) एमिशन रेगुलेशंस को लागू करने में देरी की मांग के लिए इंडस्ट्री की अगुवाई शुरू कर दी है। कंपनी, Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के साथ मिलकर इन नए मानकों के लिए एक अधिक लचीला रोडमैप तैयार करने की कोशिश कर रही है। अक्टूबर 2026 के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में टायर और ब्रेक से निकलने वाले पार्टिकल्स (non-exhaust emissions) को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम प्रस्तावित किए गए थे।\n\n### कीमतों और प्रोडक्शन पर असर\n\nसरकार का ड्राफ्ट फ्रेमवर्क अप्रैल 2029 से इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने और 2035 तक पूर्ण अनुपालन की बात करता है। Maruti Suzuki के मैनेजमेंट का मानना है कि इन नई तकनीकों को अपनाकर नियमों का पालन करने के लिए इंडस्ट्री को और वक्त चाहिए। कंपनी का सबसे बड़ा डर अचानक आने वाला 'प्राइस शॉक' है। चूंकि कंपनी पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मार्केट लीडर है और इसके ग्राहकों का एक बड़ा वर्ग कीमत के प्रति बहुत संवेदनशील है, इसलिए अचानक लागत बढ़ने से कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।\n\n### इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां\n\nयह केवल एक कंपनी का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरा ऑटोमोटिव सेक्टर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और आर्थिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। कंपनी का तर्क है कि ट्रांजिशन को सस्टेनेबल बनाने के लिए एक फेस्ड अप्रोच की जरूरत है। Ministry of Road Transport and Highways के साथ होने वाली इन चर्चाओं के नतीजे तय करेंगे कि आने वाले सालों में ऑटो कंपनियों को कितना कैपिटल एक्सपेंडिचर करना होगा।\n\n### इन्वेस्टर्स के लिए क्या है खास?\n\nइन्वेस्टर्स को अब सरकार द्वारा तय की जाने वाली अंतिम डेडलाइन पर नजर रखनी चाहिए। अगर डेडलाइन को आगे बढ़ाया जाता है, तो कंपनी को R&D इन्वेस्टमेंट और प्रोडक्शन कॉस्ट को मैनेज करने के लिए काफी समय मिल जाएगा। वहीं, अगर सरकार कड़े रुख पर कायम रहती है, तो ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स मंत्रालय की अगली गाइडलाइंस पर बारीक नजर बनाए हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कंपनी अपनी फ्यूचर प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी को कैसे एलाइन करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.