February 2026 के बिक्री आंकड़े Maruti Suzuki के लिए एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं, जो कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के प्रदर्शन में एक बड़ा अंतर दिखा रहा है। जहां कंपनी के एक्सपोर्ट्स (निर्यात) और यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) ने दमदार प्रदर्शन किया, वहीं डोमेस्टिक मार्केट में कॉम्पैक्ट कारों की बिक्री में नरमी बनी रही।
ग्रोथ में बड़ी असमानता
कुल बिक्री में 7.32% की बढ़ोतरी के पीछे एक्सपोर्ट्स का बड़ा हाथ रहा। फरवरी 2026 में ये 56.5% बढ़कर 39,155 यूनिट्स तक पहुंच गए, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 25,021 यूनिट्स था। इसी तरह, कंपनी के यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट, जिसमें Brezza, Ertiga और Grand Vitara जैसे मॉडल शामिल हैं, की बिक्री भी बढ़कर 72,756 यूनिट्स हो गई, जो पिछले साल 65,033 यूनिट्स थी। डोमेस्टिक पैसेंजर व्हीकल की कुल बिक्री मामूली बढ़कर 1,61,000 यूनिट्स पर पहुंची। हालांकि, इस सेगमेंट के भीतर, मिनी कारें (Alto, S-Presso) सिर्फ 10,238 यूनिट्स की वृद्धि दर्ज कर पाईं, जबकि कोर कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट (Swift, WagonR, Baleno, Dzire) में खासी गिरावट देखी गई। इस सेगमेंट में फरवरी 2026 में 66,386 यूनिट्स बिकीं, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 72,942 यूनिट्स था। यह दिखाता है कि कंपनी अपनी सबसे मजबूत डोमेस्टिक मार्केट में कुछ शेयर खो रही है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा का दबाव
यह स्थिति तब है जब भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में प्रतिस्पर्धा काफी तेज हो गई है। Hyundai Motor India ने अपने अब तक के सबसे बेहतरीन फरवरी की बिक्री दर्ज की, जिसमें 12.6% की ग्रोथ के साथ 66,134 यूनिट्स बिकीं। Hyundai के एक्सपोर्ट्स में भी 24.8% की जोरदार बढ़ोतरी हुई। वहीं, Mahindra & Mahindra ने भी 18% की ग्रोथ दिखाई, जिसकी अगुवाई SUVs ने की, जिनकी डोमेस्टिक बिक्री 19% बढ़ी।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय
Maruti Suzuki का मार्केट कैपिटलाइजेशन फिलहाल ₹4.66-4.76 लाख करोड़ के आसपास है। इसका Trailing Twelve Months (TTM) P/E रेश्यो लगभग 31-32 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि निवेशक कंपनी को ग्रोथ स्टॉक के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म्स का नजरिया कुछ मिश्रित है। UBS ने एक सतर्क आउटलुक के बाद अपने प्राइस टारगेट को घटाकर ₹16,920 कर दिया है, वहीं Jefferies ने हालिया तेजी के बाद स्टॉक को 'Hold' रेटिंग दी है, जो 'Buy' टेक्निकल सिग्नल के विपरीत है।
प्रोडक्शन पर फोकस
कंपनी अपनी प्रोडक्शन स्ट्रेटेजी को भी एडजस्ट कर रही है ताकि विभिन्न मॉडलों के लिए वेटिंग पीरियड कम किया जा सके। इस कदम का मकसद कस्टमर सेटिस्फैक्शन को बढ़ाना और प्रोडक्शन एफिशिएंसी को बेहतर बनाना है, खासकर जब मांग के पैटर्न में बदलाव दिख रहा है।
जोखिम और भविष्य की राह
एक्सपोर्ट्स और UVs की मजबूत बिक्री और कॉम्पैक्ट कारों की गिरती डोमेस्टिक सेल्स के बीच का यह गैप Maruti Suzuki के लिए एक बड़ा जोखिम है। कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट से मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि UVs और एक्सपोर्ट्स के प्रॉफिट मार्जिन अलग होते हैं। बढ़ती कमोडिटी कीमतों और भविष्य में रेगुलेटरी कॉस्ट में बढ़ोतरी का भी कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि FY27 में ऑटो सेक्टर की ग्रोथ घटकर 3-6% रह सकती है, जो कि पिछले साल की तुलना में कम है। ऐसे में, Maruti Suzuki को अपनी कोर कॉम्पिटिटिव स्ट्रेंथ बनाए रखने और बदलते बाजार में तालमेल बिठाने की बड़ी चुनौती का सामना करना होगा।