FY26 की चौथी तिमाही (Q4) में Maruti Suzuki India Limited का रेवेन्यू 28.2% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ ₹52,462 करोड़ रहा। यह उछाल रिकॉर्ड व्हीकल सेल्स वॉल्यूम, खासकर एक्सपोर्ट्स की वजह से आया। Q4 में एक्सपोर्ट्स 137,215 यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए, टोटल सेल्स 2,422,713 यूनिट्स और एक्सपोर्ट्स 447,774 यूनिट्स रहे। हालांकि, रेवेन्यू की यह तेजी मुनाफे में नहीं बदल सकी। चौथी तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 6.45% गिरकर ₹3,659 करोड़ पर आ गया। इसके मुख्य कारण अकाउंटिंग एडजस्टमेंट, नॉन-ऑपरेटिंग इनकम में कमी और टोटल एक्सपेंस का ₹48,125.3 करोड़ तक बढ़ जाना रहे। यह रेवेन्यू और प्रॉफिट के बीच का अंतर लागतों पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। नतीजों के ऐलान के बाद शेयर में 2.50% की गिरावट भी देखी गई।
SUV सेगमेंट में बढ़ती चुनौती
भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) अब कुल बिक्री का करीब 67-68% हिस्सा रखते हैं, जो पिछले सालों से काफी ज्यादा है। इस SUV ट्रेंड ने कॉम्पिटिशन को पूरी तरह बदल दिया है। Maruti Suzuki भले ही ओवरऑल मार्केट लीडर बनी हुई है, जिसका FY26 में 39.71% शेयर है, लेकिन कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में उसे कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। Mahindra & Mahindra अपनी SUV-केंद्रित रणनीति के दम पर UV सेगमेंट में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है, जिसका FY26 में 21% मार्केट शेयर है। Tata Motors इस सेगमेंट में 16% शेयर के साथ तीसरे नंबर पर है और मजबूत ग्रोथ दिखा रही है। वहीं, Hyundai, जो पहले ओवरऑल दूसरी सबसे बड़ी कंपनी थी, FY26 में चौथे स्थान पर खिसक गई। Maruti Suzuki के UV सेगमेंट में ग्रोथ तो हुई, लेकिन इस कैटेगरी में उसका ओवरऑल मार्केट शेयर FY26 में 26% से घटकर 24.50% रह गया, जो बताता है कि कॉम्पिटिटर्स इस खास सेगमेंट में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
लागतों का दबाव और भविष्य की राह
अपनी मार्केट लीडरशिप और मजबूत रेवेन्यू के बावजूद, Maruti Suzuki को मार्जिन पर भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। कंपनी का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो अभी भी कॉम्पैक्ट कारों पर काफी हद तक टिका है, जो कुल वॉल्यूम का 46.6% है। यह स्थिति प्रॉफिट ग्रोथ को सीमित करती है। UV सेगमेंट में आक्रामक तरीके से उतरने की कंपनी की योजना, जिसमें 2030 तक 7 नई SUV लॉन्च करने का लक्ष्य है, एक बड़े स्ट्रेटेजिक बदलाव का संकेत है। इस बदलाव के लिए भारी निवेश की जरूरत है और यह कड़े कॉम्पिटिशन के बीच हो रहा है। Mahindra और Tata जैसे प्रतिद्वंद्वी मजबूत UV पोर्टफोलियो के साथ तेजी से मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं, जिससे Maruti की प्राइसिंग पावर पर दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा, कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग लागतों में लगातार बढ़ोतरी से ऑपरेटिंग मार्जिन सिकुड़ रहे हैं, जैसा कि Q4 FY26 नतीजों में दिखा। Maruti Suzuki ने FY27 के लिए ₹14,000 करोड़ के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) की योजना बनाई है। यह पैसा उत्पादन क्षमता बढ़ाने, खासकर Kharkhoda और Gujarat में नए प्लांट लगाने के लिए होगा, जिससे लगभग 190,000 ग्राहकों के बैकलॉग को क्लियर करने में मदद मिलेगी। यह निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में अनिश्चितताएं हैं, जैसे भू-राजनीतिक मुद्दे और एल नीनो का असर, जो ग्रामीण आय और मांग को धीमा कर सकते हैं। अप्रैल 2026 से पहले के तीन महीनों में शेयर में 13.34% की गिरावट देखी गई, जो निवेशकों की सावधानी को दर्शाता है।
इंडस्ट्री का आउटलुक और एनालिस्ट्स की राय
आगे चलकर, पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री की ग्रोथ FY27 में धीमी रहने की उम्मीद है, जो 4-6% रह सकती है, जबकि FY26 में यह 8.6% थी। यह नरमी उच्च बेस इफेक्ट और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के कारण है। हालांकि, GST दरों में कटौती और नए मॉडलों के लॉन्च से मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स Maruti Suzuki पर आम तौर पर पॉजिटिव राय रखते हैं, कंसेंसस रेटिंग 'Buy' या 'Outperform' है। एवरेज 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹16,589 से ₹17,255 के बीच है, जो 28-33% का संभावित अपसाइड दिखाता है। कंपनी के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए क्षमता विस्तार, एक्सपोर्ट्स को बढ़ाना और नए प्रोडक्ट्स (जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) में स्ट्रेटेजिक निवेश महत्वपूर्ण होंगे। अपनी नई SUV लाइनअप की सफलता बाजार के बदलावों से निपटने और प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने के लिए अहम साबित होगी।
