प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी
मारुति सुजुकी इंडिया अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रही है। इसके लिए 2027 के फाइनेंशियल ईयर तक ₹14,000 करोड़ का रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) तय किया गया है। यह भारी-भरकम निवेश इसलिए जरूरी है क्योंकि कंपनी की मौजूदा प्रोडक्शन फैसिलिटीज 100% यूटिलाइजेशन पर चल रही हैं। इसका नतीजा यह है कि 2026 के अंत तक लगभग 1.9 लाख कस्टमर ऑर्डर्स पेंडिंग हैं, जो मांग और सप्लाई के बीच बड़े अंतर को दिखाता है।
कैपेसिटी बढ़ाने का प्लान
इस ₹14,000 करोड़ के निवेश का इस्तेमाल हरियाणा के खरखौदा (Kharkhoda) और गुजरात के हंसलपुर (Hansalpur) में प्रोडक्शन लाइन्स को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। इससे सालाना कैपेसिटी में 5 लाख यूनिट्स की बढ़ोतरी होगी। इस नई कैपेसिटी में से करीब 2.5 लाख यूनिट्स FY27 तक चालू हो जानी चाहिए, जिससे सप्लाई की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, गुजरात के सानंद (Sanand) में एक पांचवीं मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए भी जमीन सुरक्षित कर ली गई है। इसकी कुल कैपेसिटी 10 लाख यूनिट प्रति वर्ष रखने का प्लान है। इस फैसिलिटी के पहले फेज में 2029 तक 2.5 लाख यूनिट्स के लिए ₹10,189 करोड़ का निवेश होगा।
छोटे कारों पर खास फोकस
मारुति सुजुकी की विस्तार योजना का एक अहम हिस्सा किफायती यानी छोटी कारों का सेगमेंट है। कंपनी के चेयरमैन आर.सी. भार्गव (R.C. Bhargava) का कहना है कि भारत जैसी अर्थव्यवस्था में कम लागत वाले ट्रांसपोर्ट की जरूरत बनी रहेगी। यह फोकस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कंपनी के 1.3 लाख पेंडिंग ऑर्डर्स में से बड़ी संख्या छोटी कारों की है, जिन पर 18% GST लगता है।
दबाव में मार्जिन और एनालिस्ट्स की चिंता
हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में Q4 FY26 में 28% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹52,462 करोड़ तक पहुंच गया, लेकिन इसी अवधि में इसका कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (Net Profit) 6.4% घटकर ₹3,659 करोड़ रह गया। इसका मुख्य कारण प्रोडक्शन कैपेसिटी की सीमाएं और बढ़ती कमोडिटी कॉस्ट्स (Commodity Costs) का दबाव है। डीलरों के पास इन्वेंट्री (Inventory) सिर्फ 12 दिनों की रह गई है, जिससे सप्लाई की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।
Jefferies और Nomura जैसे ब्रोकरेज फर्मों के एनालिस्ट्स (Analysts) ने मारुति सुजुकी की डोमेस्टिक मार्केट शेयर (Market Share) बढ़ाने और मार्जिन सुधारने की क्षमता पर चिंता जताई है। वे यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) की ओर बढ़ते ग्राहकों का रुझान और बढ़ते ऑपरेटिंग कॉस्ट्स (Operating Costs) को भी एक वजह मान रहे हैं।
भविष्य का आउटलुक (Outlook)
कुल मिलाकर, कंपनी का भविष्य काफी हद तक उसकी कैपेसिटी विस्तार योजनाओं पर निर्भर करेगा। ज्यादातर एनालिस्ट्स का लॉन्ग-टर्म (Long-term) व्यू पॉजिटिव है, लेकिन MarketsMojo ने 22 अप्रैल, 2026 को स्टॉक को 'होल्ड' से 'सेल' (Sell) में डाउनग्रेड (Downgrade) कर दिया है। यह कंपनी की जीरो डेट (Zero Debt) स्थिति और मजबूत लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स के बावजूद शॉर्ट-टर्म (Short-term) मुश्किलों की ओर इशारा करता है। अगले फाइनेंशियल ईयर FY27 में पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री की ग्रोथ 4-6% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 8.6% से कम है।
