फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अप्रैल से फरवरी पीरियड में मारुति सुजुकी ने एक्सपोर्ट्स के मामले में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। कंपनी ने कुल 4,00,734 यूनिट्स का निर्यात किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 34% की जबरदस्त बढ़ोतरी को दर्शाता है।
कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, राहुल भारती ने इस बात की पुष्टि की कि मध्य पूर्व क्षेत्र से लगभग 12.5% एक्सपोर्ट्स जुड़े हुए हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं है और कंपनी के 100 से अधिक देशों में फैले डायवर्सिफाइड ग्लोबल बेस के कारण यह पूरी तरह मैनेजेबल है। यह रणनीति कंपनी को किसी एक क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता के सीधे असर से बचाने के लिए है, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए। इस बीच, कंपनी ने अपने पहले इलेक्ट्रिक एसयूवी, eVitara को भी एक्सपोर्ट मार्केट में उतारा है, जो भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन शानदार एक्सपोर्ट परफॉरमेंस के बावजूद, मारुति सुजुकी का स्टॉक फिलहाल ऊंचाई पर चल रहे वैल्यूएशन (Valuation) और व्यापक बाजार की चिंताओं के कारण दबाव में है। कंपनी का P/E रेश्यो वर्तमान में लगभग 30.8x से 32.0x के बीच चल रहा है, जो कि एशियाई ऑटो इंडस्ट्री के औसत 19.7x से काफी ज्यादा है। विश्लेषकों ने भी इस प्रीमियम वैल्यूएशन पर चिंता जताई है, और कुछ ने स्टॉक पर 'बाय' रेटिंग को घटाकर 'होल्ड' कर दिया है।
भविष्य की बात करें तो, मारुति सुजुकी की महत्वाकांक्षी योजना है कि वह FY2030-31 तक अपनी सालाना प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाकर लगभग 40 लाख यूनिट्स तक ले जाए, जिसमें 7.5 लाख से 8 लाख यूनिट्स का सालाना निर्यात शामिल होगा। हालांकि, बढ़ती इनपुट कॉस्ट, सप्लाई चेन की बाधाएं और दुर्लभ पृथ्वी सामग्री की कमी जैसी चुनौतियां इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और उनकी लागत-प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर सकती हैं।