Maruti Suzuki ने साफ किया है कि छोटी इलेक्ट्रिक कारें (EV) तभी मार्केट में उतरेंगी जब देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। कंपनी 2030 तक 1 लाख चार्जिंग पॉइंट बनाने की तैयारी में है, साथ ही FY27 में ₹14,000 करोड़ का भारी-भरकम कैपेक्स (Capex) प्लान रखा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर ही पहली प्राथमिकता
Maruti Suzuki अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रणनीति को लेकर काफी सतर्क है। हाल ही में अपनी पहली मिड-साइज इलेक्ट्रिक SUV 'e Vitara' पेश करने के बाद, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि मास-मार्केट (mass-market) के लिए छोटी इलेक्ट्रिक कारों का लॉन्च पूरी तरह से चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता पर टिका है। कंपनी जल्दबाजी में मॉडल उतारने के बजाय पहले एक मजबूत नेशनल चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना चाहती है ताकि ग्राहकों को रेंज एंग्जायटी (range anxiety) न हो।
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनी 13 चार्ज-पॉइंट ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। वर्तमान में इनका नेटवर्क 1,100 शहरों में 2,000 से ज्यादा स्टेशनों तक पहुंच चुका है और कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 1,00,000 चार्जिंग पॉइंट का जाल बिछाने का है।
पारंपरिक कारों की बिक्री का सहारा
भविष्य की तैयारियों के बीच, Maruti की मौजूदा सेल्स भी शानदार प्रदर्शन कर रही है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कंपनी की पारंपरिक छोटी कारों की मांग में 63% का उछाल देखा गया है। यही मजबूत कैश-फ्लो कंपनी के बड़े विस्तार और भविष्य के प्रोजेक्ट्स को फंड कर रहा है।
निवेश और चुनौती
Maruti Suzuki ने वित्त वर्ष 2031 तक कुल ₹77,500 करोड़ के कैपेक्स की योजना बनाई है। इसमें से अकेले FY27 के लिए ₹14,000 करोड़ का बजट रखा गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 40% ज्यादा है। कंपनी कर्ज-मुक्त (debt-free) है, इसलिए उसे महंगे कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हालांकि, निवेशकों को कुछ बातों पर नजर रखनी होगी:
- मार्केट कॉम्पिटिशन: Tata Motors और JSW MG Motor जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से ही मैदान में हैं।
- मार्जिन प्रेशर: बढ़ते निवेश और कच्चे माल की बढ़ती लागत (input inflation) क्या कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करेगी?
- एग्जीक्यूशन रिस्क: इतने बड़े चार्जिंग नेटवर्क को अलग-अलग ऑपरेटर्स के साथ मिलकर समय पर तैयार करना एक बड़ी चुनौती होगी।
