Maruti Suzuki ने अपने इन-प्लांट रेलवे साइडिंग्स के जरिए 10 लाख गाड़ियों की डिस्पैच का बड़ा आंकड़ा छू लिया है। कंपनी अब सड़क मार्ग से हटकर रेल नेटवर्क पर जोर दे रही है ताकि लागत को कम किया जा सके और पर्यावरण पर दबाव घटाया जा सके।
बड़ा लॉजिस्टिक्स बदलाव
Maruti Suzuki ने गुजरात के हंसलपुर और हरियाणा के मानेसर में अपनी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग्स का इस्तेमाल करते हुए कुल 10 लाख गाड़ियों की डिस्पैच पूरी कर ली है। कंपनी के मुताबिक, हंसलपुर से लगभग 7,90,000 और मानेसर से करीब 2,10,000 गाड़ियों को रेल नेटवर्क के जरिए भेजा गया है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 31 अगस्त 2026 तक कंपनी ने 3,00,000 से ज्यादा यूनिट्स को रेल के जरिए भेजा है।
भविष्य का टारगेट और रणनीति
ऑटो कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एक बड़ा चुनौती है। रोड ट्रांसपोर्ट के बजाय रेल नेटवर्क का इस्तेमाल करने से ईंधन की लागत और हाईवे कंजेशन की समस्याओं से बचा जा सकता है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030-31 तक रेल डिस्पैच की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 35% करने का है। इसके लिए कंपनी अपने आगामी खरखौदा (हरियाणा) प्लांट में भी नई रेल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है।
निवेशकों के लिए संकेत
भले ही यह खबर सेल्स में अचानक उछाल न लाए, लेकिन यह कंपनी की लॉन्ग-टर्म मार्जिन सुरक्षा के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। सप्लाई चेन की लागत को ऑप्टिमाइज करने से कंपनी के मुनाफे पर दबाव कम होगा। हालांकि, भारतीय रेलवे (Indian Railways) की रैक उपलब्धता और इंफ्रास्ट्रक्चर बाधाएं इसके लिए एक रिस्क फैक्टर बनी रह सकती हैं, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
