Maruti Suzuki ने जापान में **1,00,000** गाड़ियों के निर्यात का बड़ा माइलस्टोन पार कर लिया है। इसमें Jimny 5-door, FRONX और e-VITARA जैसी प्रीमियम कारें शामिल हैं। हालांकि, कंपनी के लिए घरेलू बाजार में गिरता मार्केट शेयर और मार्जिन का दबाव बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती ताकत
Maruti Suzuki India ने जापान को कुल 1,00,000 गाड़ियां निर्यात करने का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है। इस निर्यात पोर्टफोलियो में Jimny 5-door, FRONX और कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक कार e-VITARA शामिल है, जिसे सितंबर 2025 में जोड़ा गया था। यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि मारुति की भारतीय मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी अब Suzuki Motor Corporation की ग्लोबल सप्लाई चेन में कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।
एक्सपोर्ट बना ग्रोथ का इंजन
कंपनी के लिए एक्सपोर्ट अब ग्रोथ का एक अहम जरिया बन चुका है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी ने रिकॉर्ड 4,47,774 वाहनों का निर्यात किया है। खास बात यह है कि भारत में बने प्रीमियम मॉडल्स जापान के सख्त क्वालिटी और टेक्नोलॉजी मानकों पर खरे उतर रहे हैं, जो एक बड़ा भरोसा दिलाता है।
घरेलू बाजार में क्यों है सुस्ती?
एक तरफ एक्सपोर्ट में शानदार प्रदर्शन है, तो दूसरी तरफ घरेलू बाजार में कंपनी पसीने छोड़ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में Maruti Suzuki का मार्केट शेयर 40% से नीचे बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह एंट्री-लेवल छोटी कारों की घटती डिमांड है, जो कभी मारुति का सबसे मजबूत किला हुआ करता था। साथ ही, SUV सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा ने भी कंपनी की राह मुश्किल कर दी है।
मार्जिन और मुनाफे पर असर
कच्चे माल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन लगातार दबाव में है। मार्जिन को बचाने के लिए कंपनी ने सितंबर 2026 में चुनिंदा मॉडल्स की कीमतों में ₹20,000 तक का इजाफा किया है। फिलहाल शेयर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और कंपनी का स्टॉक अपने सेक्टर के अन्य साथियों के मुकाबले थोड़ा पिछड़ता नजर आ रहा है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी एक्सपोर्ट की सफलता और घरेलू बाजार की चुनौतियों के बीच संतुलन कैसे बिठाती है।
