ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी Maruti Suzuki ने मानेसर में अपना **300 kW** का ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट शुरू कर दिया है। इसका लक्ष्य साल 2031 तक कार्बन उत्सर्जन में **50%** से ज्यादा की कटौती करना है।
ग्रीन एनर्जी की ओर बड़ा कदम
Maruti Suzuki India Limited ने अपने मानेसर मैन्युफैक्चरिंग हब में 300 kW के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की शुरुआत कर दी है। कंपनी का लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा 6,15,000 टन से घटाकर 2,66,000 टन तक लाना है, जिसे फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक पूरा किया जाएगा।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
यह प्लांट स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट पर आधारित है। फैक्ट्री में छुट्टी के दिन जो अतिरिक्त सोलर एनर्जी बचती है, यह प्लांट उसी का इस्तेमाल करके हाइड्रोजन बनाता है। इससे न केवल बर्बादी रुकती है, बल्कि कंपनी बिजली ग्रिड की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी खुद को सुरक्षित कर रही है।
बड़ा निवेश और भविष्य की योजनाएं
सिर्फ हाइड्रोजन ही नहीं, कंपनी ने ₹561 करोड़ का बजट चार बड़े कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्रोजेक्ट्स के लिए रखा है। Suzuki Motor Corporation भी इस मुहिम में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ मिलकर भारत में 10 और बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
ये प्रोजेक्ट्स फिलहाल पायलट फेज में हैं, इसलिए इनका सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर दिखने में वक्त लगेगा। हालांकि, Maruti Suzuki का कैश रिजर्व मजबूत है, जिससे इन ग्रीन प्रोजेक्ट्स के चलते कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा। अब निवेशकों की नजर खरखौदा प्लांट में आने वाले बायोगैस प्रोजेक्ट और 1-MWh की बैटरी स्टोरेज सिस्टम की परफॉर्मेंस पर टिकी होगी, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 तक शुरू होने की उम्मीद है।
