Maruti Suzuki ने अपने मानेसर प्लांट में **300 kW** का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्लांट में सोलर एनर्जी से हाइड्रोजन बनाया जाएगा, जो कंपनी के **2030-31** तक कार्बन उत्सर्जन को **2.66 लाख टन** तक लाने के लक्ष्य का हिस्सा है।
Maruti Suzuki India ने अपने मानेसर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 300 kW के ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्लांट को कमीशन कर दिया है। यह प्लांट नॉन-वर्किंग दिनों में पैदा होने वाली एक्स्ट्रा सोलर एनर्जी को हाइड्रोजन में बदलकर उसे फैक्ट्री के ऑपरेशंस में फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल करेगा। यह पहल कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक बड़ी रणनीति है।
उत्सर्जन कम करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2030-31 तक अपने मैन्युफैक्चरिंग कार्बन एमिशन को मौजूदा 6.15 लाख टन से घटाकर 2.66 लाख टन पर लाने का लक्ष्य रखा है।
रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
ग्रीन हाइड्रोजन के अलावा, कंपनी खरखौदा फैसिलिटी में भी रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर दे रही है। वहां 2026-27 तक 10 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला बायोगैस प्लांट लगाने की योजना है। साथ ही, कंपनी ने 4 कंप्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्ट्स के लिए ₹561 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर देश भर में 10 बायोगैस प्लांट भी लगा रही है, जिनमें से 3 गुजरात में पहले ही काम करना शुरू कर चुके हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों को यह देखना होगा कि कैसे ये प्रोजेक्ट्स लंबी अवधि में कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर करते हैं। यदि ये रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स सफल होते हैं, तो यह ग्रिड पावर पर निर्भरता कम करेंगे, जिससे भविष्य में प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने और मार्जिन को प्रोटेक्ट करने में बड़ी मदद मिलेगी।
