Maruti Suzuki के MD हिसाशी ताकेउची ने ACMA कन्वेंशन में ऑटो कंपनियों को सतर्क किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल होते वाहनों के दौर में पूरी तरह सुरक्षा का दावा करना मुमकिन नहीं, इसलिए अब कंपनियों को साइबर हमले के बाद रिकवरी प्लान पर ध्यान देना होगा।
अब डिफेंस नहीं, रिकवरी पर जोर
ACMA की 66वीं सालाना कन्वेंशन में हिसाशी ताकेउची ने साफ कहा कि आज के दौर में साइबर हमलों से पूरी तरह बचाव करना नामुमकिन जैसा है। उन्होंने कंपनियों को 'एंटी-फ्रैजाइल' (Antifragile) बनने की सलाह दी है, ताकि हमले की स्थिति में भी प्रोडक्शन और ऑपरेशंस पूरी तरह ठप न हों।
सबक लेने की जरूरत
ताकेउची ने इंडस्ट्री को बीते कुछ बड़े हादसों की याद दिलाई। 2025 में Jaguar Land Rover को एक बड़े साइबर अटैक के कारण कई देशों में हफ्तों तक अपना मैन्युफैक्चरिंग काम बंद रखना पड़ा था। इसके अलावा, 2023 में Suzuki Motorcycle India पर हुए हमले के चलते 20,000 से ज्यादा यूनिट्स का प्रोडक्शन लॉस हुआ था। ये घटनाएं साबित करती हैं कि साइबर अटैक का सीधा असर कंपनी की बैलेंस शीट पर पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
आजकल गाड़ियां ज्यादा कनेक्टेड और डिजिटल हो गई हैं, जिससे इनका 'अटैक सरफेस' (हैकर्स के लिए एंट्री पॉइंट्स) बढ़ गया है। यह सिर्फ एक टेक मुद्दा नहीं, बल्कि फाइनेंशियल रिस्क है। किसी भी बड़े साइबर ब्रेकडाउन से सप्लाई चेन रुक सकती है और रिकवरी की भारी लागत मुनाफे को सीधे तौर पर कम कर सकती है।
बता दें कि Maruti Suzuki पहले से ही दबाव में है। हाल ही में कंपनी का प्रॉफिट 11% (YoY) गिरा है। अब साइबर सुरक्षा के लिए किए जाने वाले नए खर्चे और विदेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करने का दबाव कंपनी के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) पर असर डाल सकता है, जिस पर निवेशकों को नजर बनाए रखनी होगी।
