M&M के Q4 नतीजों पर सबकी नजर: दमदार YoY ग्रोथ की उम्मीद
Mahindra & Mahindra (M&M) 5 मई को अपने चौथे तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजों का ऐलान करेगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले तगड़ी ग्रोथ दर्ज कर सकती है। JM Financial का अनुमान है कि कंपनी का एडजस्टेड नेट प्रॉफिट ₹3,351 करोड़ से ऊपर रहेगा, जो पिछले साल से 37% ज्यादा है। वहीं, Kotak Institutional Equities ने नेट प्रॉफिट ₹3,609 करोड़ रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल से 48% की बड़ी छलांग होगी। रेवेन्यू (Revenue) में भी जोरदार उछाल की उम्मीद है। Kotak के मुताबिक, रेवेन्यू करीब ₹38,094 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल से 22% ज्यादा है। फिलहाल ₹3,167 के आसपास ट्रेड कर रहे M&M के शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। बता दें कि पिछले साल Q4 FY25 के नतीजे आने के बाद M&M के शेयर में करीब 5% का इंट्राडे उछाल देखा गया था।
तिमाही दर तिमाही गिरावट और मार्जिन पर दबाव का खतरा
हालांकि, साल-दर-साल (YoY) शानदार तस्वीर के बावजूद, M&M को तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) रेवेन्यू और प्रॉफिट में कुछ गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। इसकी मुख्य वजह ट्रैक्टर की मांग में आने वाली सीजनल कमी है। JM Financial का अनुमान है कि ट्रैक्टर वॉल्यूम में सीजनलिटी के चलते 20% की गिरावट आएगी, जिससे रेवेन्यू तिमाही-दर-तिमाही करीब 4% गिर सकता है। Kotak भी रेवेन्यू में 1% की QoQ गिरावट का अनुमान लगा रहा है। दोनों ही फर्मों को ऑटोमोटिव (Automotive) और ट्रैक्टर सेगमेंट में एवरेज सेलिंग प्राइस (ASPs) में साल-दर-साल कमी की भी आशंका है। Kotak के अनुसार, ट्रैक्टर ASPs 1% और ऑटो ASPs 2% तक गिर सकते हैं। यह प्राइसिंग प्रेशर, साथ ही कमोडिटी (Commodity) की बढ़ती कीमतों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) की बढ़ती बिक्री, मुनाफे पर असर डाल सकते हैं। Kotak का अनुमान है कि EBITDA मार्जिन साल-दर-साल 40 बेसिस पॉइंट (bp) कम हो सकते हैं, जबकि JM Financial को प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव और प्लैटिनम ग्रुप मेटल्स जैसी महंगी रॉ मैटेरियल्स की लागत बढ़ने से तिमाही-दर-तिमाही 70 bp की गिरावट की आशंका है।
EV स्ट्रेटेजी और कॉम्पिटिशन: बड़ी चिंताएं
M&M SUVs और ट्रैक्टर्स में मजबूत पकड़ रखती है, लेकिन अब उसे नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। EVs की बढ़ती बिक्री, जो कंपनी का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, फिलहाल मार्जिन पर असर डाल रही है। कॉम्पिटिटर्स की बात करें तो Maruti Suzuki (P/E ~29.15, मार्केट कैप ₹4.27 लाख करोड़) और Ashok Leyland (P/E ~29.76, मार्केट कैप ₹1.03 लाख करोड़) जैसे खिलाड़ी इस स्पेस में हैं। Tata Motors का P/E करीब 20.6 है, जबकि M&M का P/E लगभग 25.04 है। M&M की EV स्ट्रेटेजी मुनाफे को कैसे प्रभावित करेगी, यह देखना अहम होगा। FY26 में भारतीय ऑटो सेक्टर ने रिकॉर्ड 29.67 मिलियन यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जिसमें पैसेंजर व्हीकल्स 13% और ट्रैक्टर्स 19% बढ़े। हालांकि, इस प्रतिस्पर्धी माहौल में M&M के लिए अपनी मार्केट हिस्सेदारी और मार्जिन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, खासकर EVs में बदलते उपभोक्ता रुझान को देखते हुए। एनालिस्ट्स का मानना है कि Q4 FY26 के अनुमानों से चूकने या FY27 के गाइडेंस (Guidance) में कमी आने पर स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के आउटफ्लो (Outflow) से भी शेयर में गिरावट बढ़ सकती है।
डिविडेंड (Dividend) का ऐलान और FY27 का गाइडेंस
निवेशक FY26 के लिए संभावित डिविडेंड (Dividend) की घोषणा का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अनुमान है कि कंपनी ₹28–36 प्रति शेयर का डिविडेंड दे सकती है, जो FY25 में मिले ₹25.3 प्रति शेयर से ज्यादा होगा। कंपनी का FY27 के लिए गाइडेंस (Guidance) निवेशकों के सेंटिमेंट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। एनालिस्ट्स ने M&M के लिए 12 महीने का कंसेंसस प्राइस टारगेट ₹3,200 से ₹3,600 के बीच रखा है, जो ज्यादातर 'Buy' रेटिंग की ओर इशारा करता है। यह आउटलुक इस बात पर निर्भर करेगा कि M&M तिमाही नतीजों के अनुमानों पर कितना खरा उतरता है और FY27 के लिए कितना पॉजिटिव गाइडेंस (Guidance) देता है। बाजार की प्रतिक्रिया इस बात पर भी टिकी रहेगी कि M&M अपने मजबूत साल-दर-साल नतीजों को तिमाही चुनौतियों और EV ट्रांजिशन (Transition) के बीच कैसे संतुलित करता है।