'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बूस्ट, क्षमता बढ़ाने की तैयारी
M&M का यह नया प्लांट महाराष्ट्र के विदर्भ (Vidarbha) इलाके में लगेगा, जिसके सपोर्ट के लिए संभाजीनगर (Sambhajinagar) में एक सप्लायर पार्क भी बनाया जाएगा। यह अत्याधुनिक फैसिलिटी 2028 तक चालू होने की उम्मीद है और पूरी क्षमता पर एक साल में 5 लाख से ज्यादा गाड़ियां और 1 लाख ट्रैक्टर बना सकेगी। इस प्लांट का मकसद भारत की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाना है और यह M&M के नए जनरेशन के ICE (Internal Combustion Engine) और EV (Electric Vehicle) प्लेटफॉर्म्स को सपोर्ट करेगा। यह कंपनी की 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड' स्ट्रेटेजी के तहत एक बड़ा कदम है।
ऑटो सेक्टर में बढ़ती रफ्तार और नई टेक्नोलॉजी की दौड़
यह बड़ा इन्वेस्टमेंट ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर जबरदस्त ग्रोथ दिखा रहा है और साथ ही नई टेक्नोलॉजी के कारण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अनुमान है कि भारत का ऑटो मार्केट 2026 तक $300 बिलियन का हो सकता है और 2026 में इंडस्ट्री वॉल्यूम 6-8% बढ़ सकती है। ट्रैक्टर सेगमेंट, जो M&M के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, वहां भी अच्छी मांग देखी जा रही है। ICRA के मुताबिक, FY2026 में इस सेगमेंट में 15-17% की ग्रोथ का अनुमान है।
कॉम्पिटिशन और EV पर फोकस
हालांकि, M&M का 2028 में प्लांट से प्रोडक्शन शुरू करने का प्लान एक लॉन्ग-टर्म विजन दिखाता है। ऑटो इंडस्ट्री, खासकर EV स्पेस, तेज टेक्नोलॉजी चेंजेस और कड़े कॉम्पिटिशन का सामना कर रही है। दूसरे बड़े प्लेयर्स जैसे Maruti Suzuki भी अपनी कैपेसिटी बढ़ा रहे हैं और EV प्रोडक्शन में भारी निवेश कर रहे हैं। Tata Motors और Hyundai भी अपनी EV रेंज और मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ा रहे हैं।
M&M का मौजूदा P/E रेश्यो लगभग 27.3-33.2 है और मार्केट कैप करीब ₹4.44 ट्रिलियन है। एनालिस्ट्स का 'Strong Buy' कंसेंसस है और टारगेट प्राइस ₹4,218.31 है, जो 18.09% का पोटेंशियल अपसाइड दिखाता है। लेकिन, नए प्लांट से प्रोडक्शन शुरू होने में कई साल लगने के कारण, एग्जीक्यूशन रिस्क और कैपिटल एलोकेशन एफिशिएंसी अहम फैक्टर होंगे। कंपनी ने FY22-24 के लिए अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹15,900 करोड़ तक बढ़ाया था, जिसमें ICE और EV डेवलपमेंट दोनों के लिए फंड शामिल थे।
इंडस्ट्री का बड़ा पिक्चर और भविष्य की राह
M&M की ओवरऑल एक्सपेंशन प्लानिंग में महाराष्ट्र में 2,000 एकड़ से ज्यादा जमीन अधिग्रहित करना भी शामिल है, ताकि प्रोडक्ट और इंजन कैपेसिटी को बढ़ाया जा सके। यह ऑटो इंडस्ट्री में एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है, जहां टॉप कार मेकर्स 2030 तक 7.5 मिलियन यूनिट्स की कंबाइंड कैपेसिटी तक पहुंचने का लक्ष्य रख रहे हैं। ट्रैक्टर मार्केट में भी बड़े निवेश हो रहे हैं, जैसे Escorts Kubota ₹2,000 करोड़ हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग और R&D के लिए निवेश कर रही है।
2026 के लिए ऑटो सेक्टर का आउटलुक पॉजिटिव है, क्योंकि गवर्नमेंट सपोर्ट और कंज्यूमर प्रेफरेंस (जैसे CNG और EV का बढ़ता चलन) डिमांड को बढ़ा सकते हैं। M&M की फेज्ड इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी और ऑटो व फार्म इक्विपमेंट दोनों सेक्टर में डायवर्सिफिकेशन इसे इन मैक्रो ट्रेंड्स का फायदा उठाने में मदद कर सकती है। लेकिन, इस ₹15,000 करोड़ के वेंचर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि M&M अपने लॉन्ग-टर्म विजन को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाती है, तेजी से बदलती EV टेक्नोलॉजी को अपना पाती है, सप्लाई चेन की मुश्किलों को संभाल पाती है और आने वाले सालों में डोमेस्टिक व ग्लोबल मार्केट्स में अपनी कॉम्पिटिटिव एज बनाए रख पाती है।