शेयरधारकों को बंपर डिविडेंड का तोहफा
Majestic Auto Limited ने शेयरधारकों को तोहफा देते हुए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए 350% का शानदार अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि हर शेयर पर ₹35 का भुगतान किया जाएगा। यह बड़ा ऐलान कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने किया है। डिविडेंड का भुगतान 13 मार्च 2026 तक होने की उम्मीद है, जबकि रिकॉर्ड डेट 17 फरवरी 2026 तय की गई है। कंपनी की यह मेहरबानी पिछली तिमाही में उसके शानदार फाइनेंशियल परफॉरमेंस की बदौलत संभव हो पाई है।
मुनाफे में तूफानी उछाल, सब्सिडियरी की बिक्री का असर
कंपनी ने FY26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में शानदार नतीजे पेश किए। इसका स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 280.46% बढ़कर ₹5.45 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू में भी 33.49% की उछाल देखी गई और यह ₹14.19 करोड़ पर पहुंच गया। नेट प्रॉफिट मार्जिन में तो 235.19% का इजाफा हुआ और यह 38.41% पर आ गया। इस शानदार परफॉरमेंस में कंपनी की सब्सिडियरी Emirates Technologies Private Limited (ETPL) की बिक्री से मिले लगभग ₹196 करोड़ का भी बड़ा योगदान रहा।
हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि तिमाही-दर-तिमाही (Quarter-on-Quarter) के आधार पर कंपनी के रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट में बड़ी गिरावट आई है। पिछले 5 सालों में कंपनी की सेल्स ग्रोथ -1.44% रही है, और पहले के कुछ रिपोर्ट्स में कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) की भी बात कही गई थी।
डिविडेंड पाने के लिए ज़रूरी KYC और TDS की जानकारी
डिविडेंड का लाभ उठाने वाले निवेशकों को टैक्स नियमों का पालन करना होगा। Majestic Auto ने शेयरधारकों से 22 फरवरी 2026 तक अपने KYC डिटेल्स, जैसे PAN, Aadhaar कार्ड और बैंक अकाउंट की जानकारी अपडेट करने के लिए कहा है। यह कदम इसलिए ज़रूरी है ताकि Tax Deducted at Source (TDS) की सही कटौती हो सके और यदि लागू हो तो Double Taxation Avoidance Agreements (DTAA) के तहत टैक्स छूट का लाभ मिल सके। समय सीमा तक डॉक्यूमेंट्स जमा न करने पर डिविडेंड पर ज़्यादा TDS रेट लागू हो सकता है।
कंपनी का पिछला रिकॉर्ड और रेगुलेटरी मुद्दे
मौजूदा पॉजिटिव डिविडेंड ऐलान के बावजूद, Majestic Auto को अतीत में रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ा है। जून 2024 में, Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने कंपनी पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया था। यह पेनाल्टी FY18-19 के दौरान सब्सिडियरी ETPL के साथ Related-Party Transactions (RPTs) के लिए ऑडिट कमेटी और शेयरधारकों से ज़रूरी अप्रूवल न लेने पर लगी थी। इससे पहले भी SEBI ने 2021 में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति को लेकर कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मुद्दों की जांच की थी।
कंपनी का सफर और सेक्टर का भविष्य
1973 में स्थापित, Majestic Auto शुरुआत में ऑटो कंपोनेंट्स, खासकर टू-व्हीलर्स के लिए प्रमुख निर्माता थी। लेकिन 2015 से कंपनी ने अपने बिज़नेस मॉडल में बदलाव किया और सब्सिडियरी ETPL के ज़रिए कमर्शियल रियल एस्टेट और फैसिलिटी मैनेजमेंट सेवाओं में कदम रखा। यह बदलाव पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से एक रणनीतिक कदम था।
भारतीय ऑटो एंसिलरी सेक्टर (Auto Ancillary Sector) फिलहाल ज़बरदस्त ग्रोथ कर रहा है, जिसके 2030 तक USD 200 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। EVs का बढ़ता चलन, 'मेक इन इंडिया' पहल और टेक्नोलॉजिकल एडवांसेज इस ग्रोथ को हवा दे रहे हैं। हालांकि, Majestic Auto की रियल एस्टेट में मौजूदगी इसे पारंपरिक ऑटो पार्ट्स निर्माताओं से अलग बनाती है।
आगे का रास्ता
ऑटो एंसिलरी सेक्टर में Endurance Technologies और Lumax Industries जैसी कंपनियां सीधे तौर पर ऑटोमोटिव सप्लाई चेन का हिस्सा हैं। इन कंपनियों के विपरीत, Majestic Auto का रियल एस्टेट और फैसिलिटी मैनेजमेंट में डाइवर्सिफिकेशन होने से सीधी तुलना मुश्किल हो जाती है। भविष्य में, शेयरधारक कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखेंगे, खासकर एसेट बिक्री से मिले लाभ के बाद। कंपनी के रियल एस्टेट और फैसिलिटी मैनेजमेंट वेंचर्स की सफलता भी महत्वपूर्ण होगी। निवेशकों को कंपनी की भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करते समय पिछले रेगुलेटरी मुद्दों और ऑटो एंसिलरी व रियल एस्टेट जैसे डायनामिक सेक्टर्स की चाल को ध्यान में रखना चाहिए।