Mahindra & Mahindra का प्रदर्शन दूसरी तिमाही में शानदार रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट **25%** बढ़कर **₹4,588 करोड़** पर पहुंच गया है, जिसके बाद निवेशकों के उत्साह से शेयर में **5-6%** की तेजी दिखी।
मुनाफे की रफ्तार और ऑटो सेक्टर का दबदबा
सितंबर तिमाही में Mahindra & Mahindra ने बाजार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए बेहतरीन नतीजे पेश किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 25% के उछाल के साथ ₹4,588 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू भी 25% बढ़कर ₹57,553 करोड़ के स्तर को पार कर गया। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी ताकत कंपनी का ऑटोमोटिव डिवीजन रहा, जिसका रेवेन्यू 39% की जबरदस्त बढ़त के साथ ₹37,756 करोड़ पर पहुंच गया। SUV सेगमेंट की भारी डिमांड का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेल्स वॉल्यूम में 26% का इजाफा दर्ज किया गया है।
मार्जिन पर दबाव और कमोडिटी की चुनौती
एक तरफ रेवेन्यू में चमक रही, तो दूसरी तरफ बढ़ती कमोडिटी लागत ने कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाला है। स्टैंडअलोन EBITDA मार्जिन पिछले साल के 18.44% से घटकर 15.17% रह गया है। मैनेजमेंट का साफ कहना है कि रॉ मटेरियल के महंगे होने की वजह से लागत बढ़ी है, जिसे पूरी तरह से सेल्स वॉल्यूम से कवर करना मुश्किल रहा।
ट्रैक्टर बिजनेस में सुस्ती
कंपनी का फार्म इक्विपमेंट बिजनेस इस बार थोड़ा धीमा रहा। ट्रैक्टर सेगमेंट का रेवेन्यू 6% गिरकर ₹9,572 करोड़ रहा। कंपनी के मुताबिक, इस साल त्योहारों के शिफ्ट होने का असर ग्रामीण मांग पर पड़ा, जिससे ट्रैक्टर की बिक्री में अस्थायी गिरावट देखी गई है।
भविष्य की राह और सहारा
मुश्किल समय में Mahindra & Mahindra के डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल ने उसे मजबूती दी है। Mahindra Finance और Tech Mahindra जैसी सब्सिडियरी कंपनियों ने खराब दौर में भी कंपनी को बैलेंस देने का काम किया है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कमोडिटी की कीमतें कब तक स्थिर होती हैं और रूरल डिमांड में कैसी रिकवरी आती है।
