Q4 में दमदार प्रदर्शन, पर शेयर पर दबाव क्यों?
Mahindra & Mahindra ने Q4 FY26 के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 42% बढ़कर ₹4,667.67 करोड़ रहा। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू भी 29% बढ़कर ₹34,294 करोड़ पहुंच गया। ऑटोमोटिव सेगमेंट ने 32% से ज्यादा की ग्रोथ दिखाई, जबकि फार्म इक्विपमेंट बिजनेस का रेवेन्यू 26% से ज्यादा बढ़ा। इस प्रदर्शन के दम पर मैनेजमेंट ने ₹33 प्रति शेयर के डिविडेंड का भी ऐलान किया है।
नतीजों के बाद भी शेयर में गिरावट के कारण
मजबूत नतीजों के बावजूद, M&M का शेयर इस साल अब तक 15% से ज्यादा गिर चुका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी कुछ वजहें हैं। पहली, पिछले तिमाही की तुलना में नेट प्रॉफिट में मामूली 0.15% की गिरावट आई है। दूसरी, इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और इनपुट कॉस्ट (कच्चे माल की लागत) में इजाफा मार्जिन पर दबाव बना सकता है।
कॉम्पिटिशन और वैल्यूएशन पर सवाल
भारतीय ऑटो सेक्टर में अभी मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। वहीं, Competitors की बात करें तो Maruti Suzuki का रेवेन्यू 28.2% बढ़ा, लेकिन प्रॉफिट 7% गिर गया। Tata Motors का P/E ratio 55.78x है, जबकि Maruti Suzuki का 28.3x है। M&M का P/E ratio करीब 20.8 से 25.66 के बीच है, जो इंडस्ट्री एवरेज 25.57 के आसपास है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि यह वैल्यूएशन तब तक टिकाऊ नहीं है जब तक कंपनी लगातार ग्रोथ न दिखाए। इस साल शेयर का प्रदर्शन सेंसेक्स से भी कमजोर रहा है।
मार्जिन, EV और निवेशकों का भरोसा
Mahindra & Mahindra के सामने मार्जिन बनाए रखने और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और EV कॉम्पिटिशन का असर मार्जिन पर पड़ सकता है। कुछ एनालिस्ट्स का यह भी मानना है कि M&M के कुछ कॉम्पिटिटर्स SUV सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जो M&M का एक अहम सेगमेंट है। निवेशकों का भरोसा वापस लाने के लिए कंपनी को EV स्ट्रैटेजी, नए प्रोडक्ट्स और प्रॉफिटेबिलिटी पर सॉलिड गाइडेंस देनी होगी।
