Mahindra & Mahindra (M&M) ने भविष्य के लिए एक बड़ा प्लान सामने रखा है। कंपनी 2031 तक 26 नए व्हीकल लॉन्च करने वाली है, जिसमें SUV और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पर खास जोर रहेगा। इस मेगा प्लान के लिए कंपनी ₹24,112 करोड़ का भारी निवेश करेगी, जिसमें नागपुर में एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी शामिल है।
2031 तक 26 नए व्हीकल, 6 इलेक्ट्रिक SUV शामिल
M&M का यह महत्वाकांक्षी रोडमैप अगले पांच सालों के लिए है। इस नए लाइनअप में 16 SUV शामिल होंगी, जिनमें से 6 पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी। इसके अलावा, 10 नए लाइट कमर्शियल व्हीकल भी पेश किए जाएंगे। इस ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए कंपनी कुल ₹24,112 करोड़ का निवेश करेगी। इसमें चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹9,112 करोड़ का कैपिटल स्पेंडिंग और नागपुर में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बनाने के लिए प्रस्तावित ₹15,000 करोड़ शामिल हैं।
नागपुर प्लांट और फ्लेक्सिबल मैन्युफैक्चरिंग
नागपुर में प्रस्तावित नया प्लांट कंपनी की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है। उम्मीद है कि 2028 तक यहां प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। प्लांट के पूरी तरह चालू होने पर, यह सालाना पांच लाख से ज्यादा व्हीकल और एक लाख ट्रैक्टर बनाने की क्षमता रखेगा। साथ ही, कंपनी अपने चाकन प्लांट में NU_IQ मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म के लिए प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रही है। यह प्लेटफॉर्म एक ही लाइन पर इलेक्ट्रिक और पारंपरिक इंजन वाले व्हीकल बनाने की सुविधा देता है। इस फ्लेक्सिबल मैन्युफैक्चरिंग अप्रोच से कंपनी बदलती कंज्यूमर डिमांड के हिसाब से खुद को ढाल पाएगी।
मार्केट में मजबूत पकड़ और आगे की राह
Mahindra ने लगातार 43वें साल भारतीय ट्रैक्टर मार्केट में अपनी लीडरशिप बरकरार रखी है। ऑटोमोटिव सेगमेंट में भी कंपनी ने FY26 में 6,60,276 SUV की रिकॉर्ड बिक्री के साथ एक नया मुकाम हासिल किया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट को बढ़ावा देने के लिए, कंपनी अपने 'Charge_iN' नेटवर्क का विस्तार कर रही है और 2027 के अंत तक 1,000 चार्जिंग पॉइंट का लक्ष्य रखा है। हाल ही में SML Isuzu में 58.96% हिस्सेदारी खरीदने से कंपनी की कमर्शियल ट्रक और बस मार्केट में मौजूदगी बढ़कर 6% हो गई है।
निवेशकों की चिंताएं और आगे का रास्ता
चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए, M&M को SUV सेगमेंट में मिड-टू-हाई टीन्स ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि फार्म इक्विपमेंट बिजनेस में मिड-सिंगल-डिजिट ग्रोथ का अनुमान है। हालांकि, ये ग्रोथ प्रोजेक्शन पॉजिटिव हैं, लेकिन निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी इन बड़े कैपिटल प्रोजेक्ट्स को अपनी प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाले बिना कैसे पूरा करती है। बड़े पैमाने पर खर्च अक्सर शॉर्ट-टर्म कैश फ्लो को प्रभावित करता है, और कंपनी ने अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को सुरक्षित रखने के लिए सप्लाई चेन डी-रिस्किंग पर काम करने पर जोर दिया है। भारतीय SUV मार्केट में Tata Motors और Hyundai जैसे प्रतिद्वंद्वियों से लगातार नई लॉन्चिंग के चलते कड़ी प्रतिस्पर्धा, कंपनी की भविष्य की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी।
