Mahindra & Mahindra ने साफ कर दिया है कि वह अपने ऑटोमोटिव और फार्म इक्विपमेंट बिजनेस को अलग नहीं करेगी। कंपनी का मानना है कि दोनों को एक साथ रखने से बेहतर वैल्यू मिलती है।
Mahindra & Mahindra (M&M) ने अपनी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि कंपनी अपने मुख्य ऑटोमोटिव और फार्म इक्विपमेंट बिजनेस को एक ही इकाई के तौर पर संचालित करना जारी रखेगी। कंपनी का मानना है कि इन्हें अलग करने के बजाय एक साथ रखना लॉन्ग टर्म में ज्यादा फायदेमंद है।
सिनर्जी (Synergy) पर बड़ा दांव
जहां टाटा मोटर्स जैसे बड़े खिलाड़ी डीमर्जर का रास्ता चुनकर अपने बिजनेस को अलग-अलग यूनिट्स में बांट रहे हैं, वहीं M&M ने एक अलग रुख अपनाया है। कंपनी का तर्क है कि दोनों बिजनेस को एक छत के नीचे रखने से इंजीनियरिंग टैलेंट, मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म और सप्लाई चेन की एफिशिएंसी का बेहतर लाभ मिलता है।
रिस्ट्रक्चरिंग से इनकार नहीं
भले ही कोर बिजनेस को अलग करने का विचार कंपनी ने ठुकरा दिया हो, लेकिन मैनेजमेंट रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से बदलाव के लिए तैयार है। हाल ही में कंपनी ने अपने ट्रक और बस बिजनेस को SML Mahindra को ट्रांसफर किया है, ताकि उस विशेष सेगमेंट पर बेहतर फोकस किया जा सके।
मजबूत फाइनेंशियल नींव
कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति बेहद मजबूत है। लो डेट-टू-इक्विटी रेशियो के चलते कंपनी को पैसा जुटाने के लिए बिजनेस अलग करने की कोई जरूरत नहीं है। इसी दम पर M&M अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोग्राम और पारंपरिक इंजन वाली गाड़ियों पर बड़े निवेश कर पा रही है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनी अपने 8 अलग-अलग प्रोडक्ट प्रोग्राम्स के बीच रिसोर्स का आवंटन कैसे करती है। भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव और मानसून का ट्रेंड कंपनी के ट्रैक्टर और पैसेंजर व्हीकल की डिमांड पर सीधा असर डाल सकता है, जिस पर मार्केट की नजर बनी रहेगी।
