Mahindra Last Mile Mobility अब अपनी सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को **3,00,000 यूनिट्स** से बढ़ाकर दोगुना करने की योजना बना रही है। कंपनी इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए नए ठिकानों की तलाश में है, ताकि आने वाले **12 से 18 महीनों** में संभावित IPO के लिए खुद को तैयार कर सके।
उत्पादन बढ़ाने की आक्रामक रणनीति
Mahindra & Mahindra की सब्सिडियरी कंपनी, Mahindra Last Mile Mobility Limited (MLMML), इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार में अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। कंपनी ने अब अपनी मौजूदा 3,00,000 यूनिट्स की सालाना क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की मांग तेजी से बढ़ रही है और ये पारंपरिक फ्यूल वाहनों की जगह ले रहे हैं।
बाजार की स्थिति और लक्ष्य
कंपनी ने हाल ही में 4 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का मील का पत्थर पार किया है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक पैसेंजर थ्री-व्हीलर की बाजार में हिस्सेदारी 40% से 50% के बीच है, जिसके 2030 तक 80% तक पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ते बाजार को कैप्चर करने के लिए कंपनी अगले 2 सालों में 8 नए इलेक्ट्रिक व्हीकल वेरिएंट्स लॉन्च करने वाली है, जिसमें कार्गो सेगमेंट पर खास जोर दिया जाएगा।
निवेश और विस्तार की राह
उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनी तेलंगाना और उत्तराखंड जैसी जगहों पर अपनी मौजूदा फैसिलिटीज को बढ़ाने या नई 'ग्रीनफील्ड' फैक्ट्रियों को लगाने पर विचार कर रही है। पैरेंट कंपनी Mahindra & Mahindra ने पहले ही ग्रोथ के लिए ₹322 करोड़ का निवेश किया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Investor Radar)
हालांकि ग्रोथ की संभावनाएं बड़ी हैं, लेकिन 18 से 24 महीने के भीतर क्षमता दोगुनी करना एक चुनौतीपूर्ण काम है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी को बहुत सटीक एग्जीक्यूशन की जरूरत होगी।
भविष्य की तैयारी: IPO की आहट
कंपनी मैनेजमेंट आने वाले 12 से 18 महीनों में संभावित IPO की तैयारी कर रही है। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कैसे अपनी ग्रोथ को बरकरार रखती है और कैपिटल को कितनी कुशलता से इस्तेमाल करती है। निवेशकों को कंपनी के नए प्लांट लोकेशन्स और रेग्युलेटरी अप्रूवल्स पर नजर रखनी चाहिए।
