Mahindra & Mahindra की इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सब्सिडियरी, Mahindra Last Mile Mobility (MLMML) ने निवेशकों से **₹322 करोड़** जुटाए हैं। इस फंड जुटाने के राउंड के बाद कंपनी का वैल्यूएशन **₹10,822 करोड़** हो गया है। यह पूंजी कंपनी को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में विस्तार करने में मदद करेगी।
निवेशकों का भरोसा बढ़ा
Mahindra Last Mile Mobility (MLMML) ने ₹322 करोड़ का फ्रेश कैपिटल जुटाया है, जिसके बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन ₹10,822 करोड़ पर पहुंच गया है। यह फंड ग्लोबल सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Lightrock से आया है। मौजूदा निवेशकों, जिनमें इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) और इंडिया-जापान फंड (IJF) शामिल हैं, ने भी इस राउंड में हिस्सा लिया और अपने प्री-एम्प्टिव राइट्स का इस्तेमाल करके अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखी।
मालिकाना हक और स्ट्रेटेजी पर असर
इस डील के बाद, पैरेंट कंपनी Mahindra & Mahindra की सब्सिडियरी में हिस्सेदारी 75.79% रह जाएगी, जो पहले 78.11% थी। हालांकि, हिस्सेदारी में थोड़ी कमी के बावजूद, पैरेंट कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल बना रहेगा। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल ऑपरेशन्स के तेजी से विस्तार के लिए फंड करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। इस पूंजी का इस्तेमाल भारतीय सड़कों पर 2031 तक एक मिलियन इलेक्ट्रिक व्हीकल उतारने के लक्ष्य को पूरा करने में किया जाएगा।
मार्केट पोजीशन और सेल्स ग्रोथ
MLMML ने L5 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, जो कार्गो और पैसेंजर ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल होते हैं। कंपनी का इस कैटेगरी में मार्केट शेयर लगभग 40% है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में एक लाख से अधिक यूनिट्स की बिक्री दर्ज की है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, सेल्स वॉल्यूम में 85% का सालाना उछाल देखा गया है, जो भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की लगातार बढ़ती मांग को दर्शाता है।
सेक्टर के रुझान और चुनौतियाँ
पिछले दो सालों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में तेजी से विद्युतीकरण (electrification) हुआ है, जिसमें पेनिट्रेशन 12% से बढ़कर 40% हो गया है। यह ग्रोथ कंपनी के लिए सकारात्मक है, लेकिन सेक्टर को लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बैटरी टेक्नोलॉजी व चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की जरूरत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल स्पेस में अधिक खिलाड़ी आने के साथ, कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए लागत प्रबंधन और प्रतिस्पर्धी परिदृश्य को नेविगेट करना होगा।
