डीजल एसयूवी की डिमांड बरकरार, पर आफत में लागत!
आजकल कई कार निर्माता कंपनियां पेट्रोल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन भारत में डीजल गाड़ियों, खासकर एसयूवी की डिमांड अभी भी मजबूत है। पिछले 3 सालों में भारत के पैसेंजर व्हीकल मार्केट में एसयूवी का हिस्सा करीब 18% रहा है। ये एसयूवी अपनी पावर, हाईवे ड्राइविंग और लंबी रेंज के लिए पसंद की जाती हैं। इसी सेगमेंट में Mahindra & Mahindra (M&M) अब सबसे आगे निकल गई है। 2025 में कंपनी ने डीजल सेगमेंट में करीब 56% का मार्केट शेयर कब्जा लिया है और कुल डीजल कार बिक्री में आधे से ज़्यादा हिस्सेदारी बनाई है। Scorpio, Thar और Bolero जैसी गाड़ियां खूब बिक रही हैं।
BS7 एमिशन नियम करेंगे कीमतें आसमान!
हालांकि, M&M का यह दबदबा आने वाले BS7 एमिशन स्टैंडर्ड्स से बड़ी चुनौती में है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इन नए नियमों के कारण हर गाड़ी पर ₹30,000 से लेकर ₹1 लाख तक का अतिरिक्त खर्च आएगा। यह भारी बढ़त डीजल की पारंपरिक सस्ती कीमत के फायदे को खत्म कर सकती है, खासकर ₹10-20 लाख की कीमत वाली एसयूवी के लिए। डीजल की परफॉरमेंस और टॉर्क भले ही पसंद की जाती हो, लेकिन BS7 के बाद बढ़ी हुई लागत शायद इन फायदों पर भारी पड़े।
M&M की EV और नई इंजन टेक्नोलॉजी की तैयारी
इस डीजल एसयूवी लीड का फायदा उठाते हुए, M&M भविष्य के रिस्क को कम करने के लिए एक अलग इंजन स्ट्रैटेजी पर भी काम कर रही है। कंपनी अपनी एसयूवी लाइन-अप में कई तरह के ऑप्शन ला रही है। वह इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) प्लान्स को तेजी से आगे बढ़ा रही है, साथ ही इंटरनल कंबस्चन इंजन (ICE) में भी इनोवेशन कर रही है। M&M हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर भी गौर कर रही है, ताकि अलग-अलग कस्टमर की डिमांड और बदलते नियमों को पूरा किया जा सके।
बाकी कंपनियां भी कर रहीं बदलाव
दूसरे कार निर्माता भी इस बदलते बाजार के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। Tata Motors अभी भी Harrier और Safari एसयूवी में डीजल इंजन ऑफर कर रही है, वहीं वह अपने EV और CNG मॉडल्स को भी प्रमोट कर रही है। Hyundai India के लिए डीजल में ग्राहकों की रुचि बढ़ रही है, FY26 में Creta जैसे मॉडल्स में उसका शेयर 21% रहा, और कंपनी अपनी EV रेंज का विस्तार कर रही है। वहीं, Maruti Suzuki ने डीजल मार्केट से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला किया है। कुल मिलाकर एसयूवी मार्केट काफी मजबूत है, जो पैसेंजर कार बिक्री का करीब 65% हिस्सा है। लेकिन पेट्रोल और इलेक्ट्रिक व्हीकल की ग्रोथ तेज रहने की उम्मीद है, जिसमें EV सालाना 21.65% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
M&M के लिए रिस्क: डीजल पर निर्भरता और बदलाव की चुनौतियाँ
M&M की डीजल एसयूवी में लीडरशिप में रिस्क भी हैं। ऐसे सेगमेंट पर निर्भर रहना जो सख्त एमिशन नियमों और खरीदारों की बदलती पसंद के कारण सिकुड़ने की उम्मीद है, भविष्य में समस्या बन सकती है। BS7 कंप्लायंस के लिए बड़े निवेश से प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है, खासकर अगर बढ़ी हुई कीमतें बजट-सचेत खरीदारों को दूर कर दें। इसके अलावा, EV और हाइब्रिड की तेज ग्रोथ सीधा खतरा पैदा करती है, जिसके लिए नई टेक्नोलॉजी में लगातार इनोवेशन और भारी फंड की जरूरत होगी। M&M का फाइनेंशियल रिजल्ट मजबूत रहा है, FY25 में ₹1,59,211 करोड़ का रेवेन्यू और ₹12,929 करोड़ का PAT रहा, और Q4 FY26 में ₹4,667.57 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया गया। हालांकि, इसका 21-22 के P/E रेश्यो बताता है कि निवेशक भविष्य की ग्रोथ पर दांव लगा रहे हैं, जो कंपनी की वर्तमान इंजन स्ट्रेंथ से आगे बढ़ने की क्षमता पर निर्भर है। कंपनी 2031 तक 16 नए मॉडल लॉन्च करने की योजना बना रही है ( 10 ICE, 6 EV) ताकि अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस कर सके, लेकिन कॉम्पिटिटिव EV मार्केट में इस डुअल स्ट्रैटेजी को सफलतापूर्वक लागू करना महत्वपूर्ण होगा। पूरी ऑटो इंडस्ट्री को FY2027 में बढ़ी हुई रेगुलेटरी लागतों के कारण 3-6% की धीमी ग्रोथ का सामना करना पड़ सकता है, जो बिक्री और प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।
आगे का रास्ता: M&M की नई इंजन टेक्नोलॉजी की ओर यात्रा
एनालिस्ट्स आमतौर पर Mahindra & Mahindra को पॉजिटिव रूप से देखते हैं, जिसमें 'Buy' रेटिंग और टारगेट प्राइस अच्छे फ्यूचर ग्रोथ का संकेत देते हैं। कंपनी 2031 तक 10 नए ICE मॉडल और 6 नए EV लॉन्च करके भविष्य के लिए तैयार हो रही है, जिसमें नए व्हीकल डिजाइन और स्केलेबल प्लेटफॉर्म पर फोकस किया जा रहा है। यह बैलेंस्ड स्ट्रैटेजी अपनी मजबूत एसयूवी अनुभव का फायदा उठाते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने का लक्ष्य रखती है। जैसे-जैसे रेगुलेशन सख्त होंगे और ग्राहकों के पास ज्यादा विकल्प आएंगे, M&M की सफलता अपने मौजूदा डीजल बिजनेस को अच्छी तरह मैनेज करने के साथ-साथ EV और हाइब्रिड में इनोवेशन करके मार्केट लीडरशिप और फाइनेंशियल स्ट्रेंथ बनाए रखने पर निर्भर करेगी।
