Mahindra & Mahindra ने साउथ अफ्रीका के ऑटोमोटिव मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कमर कस ली है। कंपनी अपने मौजूदा प्लांट में completely knocked-down (CKD) असेंबली को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। इस रणनीतिक कदम का मूल्यांकन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Industrial Development Corporation) के साथ किया जा रहा है, जो साउथ अफ्रीका के मार्केट के प्रति कंपनी की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस अपग्रेड का मकसद स्थानीय स्तर पर बजट-अनुकूल (budget-friendly) गाड़ियों की बढ़ती मांग को पूरा करना है। साथ ही, यह साउथ अफ्रीकी सरकार द्वारा विचार किए जा रहे संभावित इम्पोर्ट ड्यूटी (import duties) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का भी काम करेगा।
साउथ अफ्रीका का ऑटोमोटिव मार्केट, खासकर मिड-मार्केट सेगमेंट, इन दिनों बेहद प्रतिस्पर्धी (competitive) बन गया है। चीनी ऑटोमेकर्स जैसे Chery Automobile Co. ने बाजार में आक्रामक तरीके से कदम रखा है। उन्होंने तो Nissan Motor Co. के पुराने प्लांट को भी खरीद लिया है। वहीं, Mercedes-Benz Group AG भी Great Wall Motor Co. के साथ अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं साझा करने पर विचार कर रही है। दूसरी ओर, Suzuki Motor Co. भारत से कारें इम्पोर्ट कर रही है, और Toyota Motor Co. पहले से ही मार्केट में अपना दबदबा बनाए हुए है।
Mahindra का साउथ अफ्रीका में 2018 से एक असेंबली प्लांट पहले से काम कर रहा है, जहाँ वह अपनी लोकप्रिय Pik Up लाइट ट्रक्स का निर्माण करती है। CKD प्रोडक्शन को जोड़ने से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में काफी वृद्धि होगी। इस प्रक्रिया में, वाहनों को पार्ट्स के रूप में इम्पोर्ट किया जाता है और फिर स्थानीय स्तर पर उन्हें असेंबल किया जाता है। यह रणनीति सरकार द्वारा विचार किए जा रहे तैयार वाहनों के इम्पोर्ट पर लगने वाले संभावित उच्च टैरिफ से बचने में मदद करेगी।
यह नियोजित निवेश अफ्रीका क्षेत्र में प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने और किफायती परिवहन (affordable transport) की मांग को पूरा करने के लिए Mahindra की रणनीति को उजागर करता है। यह Tata Motors Passenger Vehicles Ltd. जैसे अन्य भारतीय ऑटोमेकर्स के नक्शेकदम पर है, जिन्होंने हाल ही में साउथ अफ्रीका में कारें बेचना फिर से शुरू किया है। स्थानीय प्रोडक्शन को बढ़ाकर, Mahindra का लक्ष्य अपनी मार्केट पोजिशन को सुरक्षित करना और देश की बदलती आर्थिक व व्यापार नीतियों (trade policies) के बीच आगे बढ़ना है।