SIAM के नए आंकड़ों के मुताबिक, Q1 FY27 में महाराष्ट्र पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में टॉप पर है, जबकि उत्तर प्रदेश टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर मार्केट का किंग बना हुआ है। निवेशक अब नजर गड़ाए हुए हैं कि यह क्षेत्रीय मांग कंपनियों के इन्वेंट्री मैनेजमेंट और प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर डालेगी।
सेल्स के आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) की Q1 FY27 की रिपोर्ट ने भारतीय ऑटो मार्केट की बदलती तस्वीर को साफ कर दिया है। आंकड़े बताते हैं कि चार-पहिया वाहनों के लिए पश्चिम भारत हब बना हुआ है, जबकि टू-व्हीलर सेगमेंट की कमान उत्तरी राज्यों के पास है।
महाराष्ट्र बनाम उत्तर प्रदेश: कौन कहां आगे?
महाराष्ट्र में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 1,47,440 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई, जबकि कुल नेशनल सेल्स 12.74 लाख यूनिट्स रही। कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी महाराष्ट्र 36,433 यूनिट्स के साथ सबसे आगे रहा। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश ने टू-व्हीलर सेगमेंट में बाजी मारी है, जहां 8,82,047 यूनिट्स की बिक्री हुई (नेशनल टोटल: 56.29 लाख)। थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी यूपी 25,669 यूनिट्स के साथ टॉप पर है।
निवेशकों के लिए चेतावनी: इन्वेंट्री और मार्जिन
Kotak Neo Research के मुताबिक, केवल बिक्री के आंकड़े काफी नहीं हैं। ऑटो कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'कमोडिटी कॉस्ट' है। अगर रॉ मटेरियल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालेंगी या खुद सहन करेंगी। इन्वेंट्री का सही मैनेजमेंट ही आने वाली तिमाही में कंपनियों की 'Operational Efficiency' तय करेगा।
