महाराष्ट्र सरकार की नई EV Policy 2025-2030 आ गई है, जो अप्रैल 2025 से लागू हो गई है। इस बार निजी कार खरीदने पर सब्सिडी की जगह चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल वाहनों पर फोकस किया गया है। ₹1,993 करोड़ के बजट वाली इस पॉलिसी के तहत अब हाईवे पर चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य होंगे और प्रमुख एक्सप्रेस-वे पर टोल टैक्स में छूट मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा जोर, टोल में 100% छूट
महाराष्ट्र की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2025-2030, जो 1 अप्रैल, 2025 से लागू है, राज्य के ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रही है। ₹1,993 करोड़ के कुल बजट के साथ, सरकार ने अब निजी इलेक्ट्रिक कारों की खरीद पर सीधे सब्सिडी देने की बजाय चार्जिंग स्टेशन और कमर्शियल वाहनों के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया है।
यह नई नीति रेंज एंजाइटी (Range Anxiety) को दूर करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर बड़ा दांव लगा रही है। अब राज्य और राष्ट्रीय हाईवे पर हर 25 किलोमीटर पर फास्ट-चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, नई आवासीय और कमर्शियल बिल्डिंग में भी चार्जिंग की सुविधा देने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MSRTC) के डिपो और रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) में भी चार्जिंग स्टेशन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत खोले जाएंगे।
EV मालिकों को बड़ी राहत देते हुए, मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे, समृद्धि महामार्ग और अटल सेतु जैसे प्रमुख रास्तों पर 100% टोल माफी दी जाएगी। हालांकि, इस छूट का असली फायदा तभी मिलेगा जब EV रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम के बीच तालमेल बैठेगा। VAHAN डेटाबेस और FASTag सिस्टम के बीच तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से गलत चालान कटने के मामले सामने आए हैं, जिन्हें ठीक करने पर सरकार काम कर रही है।
सब्सिडी की रणनीति में बड़ा बदलाव
2025 की पॉलिसी का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि निजी इलेक्ट्रिक कारों के लिए खरीद सब्सिडी अब बंद कर दी गई है। इसके बजाय, सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और कमर्शियल वाहनों के लिए सहायता राशि दे रही है। यह कदम व्यक्तिगत वाहन स्वामित्व को बढ़ावा देने की बजाय इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल बेड़े को अपनाने को प्रोत्साहित करेगा। ऑटो कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि राज्य में EV की मांग अब कमर्शियल लॉजिस्टिक्स और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर झुक सकती है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इनগুলোর बावजूद, राज्य को EV की बढ़ती संख्या के साथ तालमेल बिठाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में EV रजिस्ट्रेशन में 13% की वृद्धि देखी गई, लेकिन कुल एडॉप्शन रेट अभी भी वाहनों की शुरुआती कीमत और चार्जिंग पॉइंट्स की उपलब्धता पर निर्भर करता है। चार्जिंग स्टेशन बनाने और चलाने के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती है। अगर सरकार का वित्तीय समर्थन या इन स्टेशनों का इस्तेमाल उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है।
पॉलिसी का अगला बड़ा पड़ाव बस डिपो में चार्जिंग स्टेशन का काम पूरा होना और ऑटोमेटेड टोल माफी सिस्टम का स्थिर होना है। इन प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति को प्रभावित करेगा, क्योंकि खरीदारों के लिए भरोसेमंद चार्जिंग और बिना रुकावट की यात्रा सबसे अहम जरूरतें बनी हुई हैं।
