ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal के अनुसार, MRF का शेयर अभी 24.4x FY27 और 21.7x FY28 की अनुमानित कमाई पर ट्रेड कर रहा है। फर्म का अनुमान है कि FY28 तक कंपनी की सालाना कमाई में मुश्किल से 1% की ग्रोथ दिखेगी। साथ ही, कंपनी के Return on Capital Employed (RoCE) के 11.8% से घटकर FY27 तक 10% पर आने का अनुमान है। Motilal Oswal ने शेयर के लिए ₹113,936 का टारगेट प्राइस तय किया है।
यह सब तब है जब MRF ने हाल ही में अपने Q4 FY26 के नतीजे पेश किए थे, जिसमें कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 13.7% बढ़कर ₹8,044 करोड़ और नेट प्रॉफिट 37.6% उछलकर ₹702 करोड़ रहा था। पूरे फाइनेंशियल ईयर FY26 में रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹30,652 करोड़ और नेट प्रॉफिट 29% बढ़कर ₹2,355 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी मैनेजमेंट ने मजबूत डिमांड, GST दरों में कटौती और कैपेसिटी बढ़ाने की योजनाओं का जिक्र किया था।
हालांकि, मैनेजमेंट ने कुछ चिंताओं को भी उजागर किया है। उनका मानना है कि अगर आने वाला मॉनसून कमजोर रहा तो ट्रैक्टर और टायर की बिक्री में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव भी कंपनी पर बना हुआ है।
MRF का वैल्यूएशन अपने प्रतिस्पर्धियों से काफी ऊपर दिख रहा है। जहां MRF का P/E रेश्यो करीब 24.67x है, वहीं JK Tyre & Industries का 17.37x-17.67x, Apollo Tyres का 28.32x-30.25x और CEAT Ltd. का लगभग 19.11x-27.7x के आसपास है। भले ही भारतीय ऑटो एंसिलरी सेक्टर में घरेलू मांग के चलते 7-9% की ग्रोथ का अनुमान है, MRF का प्रीमियम वैल्यूएशन अलग दिखता है।
कंपनी का बैलेंस शीट मजबूत है, जिसमें डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.163 और नेट डेट टू इक्विटी रेश्यो 0.02 है। लेकिन, हालिया 'क्वालिटी ग्रेड डाउनग्रेड' कुछ अंतर्निहित समस्याओं की ओर इशारा करता है, जैसे कमाई की कंसिस्टेंसी और कैपिटल एम्प्लॉयड की एफिशिएंसी। MRF का डिविडेंड पेआउट रेश्यो भी सिर्फ 5.33% है, जो तत्काल आय रिटर्न के लिए सीमित अवसर दर्शाता है।
