MRF के शेयरों में मंगलवार को करीब 2% की गिरावट देखने को मिली। कंपनी की पहली तिमाही की कमाई उम्मीदों से कम रही, जिसका मुख्य कारण इनपुट लागतों में हुई बढ़ोतरी है। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू बढ़ा है, लेकिन ऑपरेटिंग मार्जिन में आई कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
मुनाफे में क्यों आई गिरावट?
MRF लिमिटेड ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए अपनी वित्तीय रिपोर्ट जारी की है। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.64% बढ़कर ₹8,415.50 करोड़ रहा। लेकिन, नेट प्रॉफिट ₹495.35 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कम है।
इस गिरावट की मुख्य वजह ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन का सिकुड़ना है। यह मार्जिन पिछले साल के 13.95% से घटकर इस तिमाही में 11.77% रह गया। कंपनी का कहना है कि कच्चे माल, खासकर नेचुरल रबर की कीमतों में इजाफा होने से मुनाफे पर सीधा असर पड़ा है। टायर बनाने वाली कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि जब कच्चे माल की लागत बढ़ती है और उसे पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता, तो सीधे तौर पर कंपनी के बॉटम लाइन पर असर पड़ता है।
मैनेजमेंट में बदलाव
कंपनी ने कुछ प्रशासनिक बदलावों का भी ऐलान किया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने प्रशांत पुलिकोट्टू और संतोष मैथ्यू को 11 अगस्त, 2026 से सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी दी है।
आगे क्या?
अब निवेशकों और मार्केट पर नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि MRF अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे सुधार पाती है। टायर इंडस्ट्री ऑटोमोबाइल डिमांड और कमोडिटी की कीमतों के प्रति काफी संवेदनशील होती है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि मैनेजमेंट लागत प्रबंधन के लिए क्या रणनीति अपनाता है और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता आती है या नहीं। इनपुट कॉस्ट में किसी भी तरह की अस्थिरता कंपनी के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है।
