Ministry of Heavy Industries में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सेक्रेटरी कामरान रिजवी के रिटायरमेंट के साथ ही अब ₹38,000 करोड़ के EV और ऑटो इंसेंटिव्स के भविष्य पर सबकी निगाहें टिक गई हैं।
Ministry of Heavy Industries (MHI) एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। सेक्रेटरी कामरान रिजवी अक्टूबर 2026 के अंत में रिटायर होने वाले हैं। यह प्रशासनिक फेरबदल भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए काफी अहम है क्योंकि मंत्रालय के पास कुल ₹38,000 करोड़ के इंसेंटिव प्रोग्राम्स की जिम्मेदारी है। इसमें ₹11,900 करोड़ का PM E-DRIVE और ₹25,938 करोड़ का ऑटोमोटिव PLI स्कीम शामिल है।\n\nऑटो मैन्युफैक्चरर्स के लिए ये स्कीम्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की तरफ बढ़ने और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए लाइफलाइन की तरह हैं। कंपनियों ने अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर और प्रोडक्ट डेवलपमेंट इन्हीं इंसेंटिव्स को ध्यान में रखकर प्लान किया है। ऐसे में एडमिनिस्ट्रेटिव देरी से सब्सिडी मिलने के समय पर असर पड़ सकता है, जो सीधे कंपनियों के कैश फ्लो को प्रभावित करेगा।\n\nफिलहाल कामकाज की जिम्मेदारी एडिशनल सेक्रेटरी डॉ. हनीफ कुरैशी संभाल रहे हैं, जो FAME-II से PM E-DRIVE के ट्रांजिशन में अहम भूमिका निभा चुके हैं। वहीं, नए डिप्टी सेक्रेटरी के रूप में अंकित चौहान की नियुक्ति संकेत देती है कि सरकार डोमेस्टिक वैल्यू-एडिशन (DVA) के नियमों को लेकर और सख्त होने वाली है। सरकार ₹780 करोड़ का निवेश टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ARAI और NATRAX को अपग्रेड करने में भी कर रही है ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।\n\nइस नेतृत्व बदलाव के अलावा ऑटो सेक्टर के सामने कड़े फ्यूल-एफिशिएंसी स्टैंडर्ड्स और BS7 नॉर्म्स जैसी चुनौतियां भी हैं। इंडस्ट्री अब इस बात पर नजर रखेगी कि नए नेतृत्व में सब्सिडी अप्रूवल प्रोसेस और सर्टिफिकेशन टाइमलाइन में क्या बदलाव आते हैं, क्योंकि यही फैक्टर आने वाले समय में प्रोजेक्ट्स की सफलता तय करेंगे।
