लग्जरी कार खरीदारों के लिए बुरी खबर है। Mercedes-Benz, BMW और Audi जैसी कंपनियों ने रुपये में गिरावट और बढ़ती लागत का हवाला देते हुए कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे GST के फायदे पूरी तरह खत्म हो गए हैं।
भारत के लग्जरी कार बाजार में कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा टैक्स रेशनलाइजेशन के जरिए कारों की कीमतों में की गई 5% से 7% की कटौती का असर लगभग खत्म हो चुका है। साल 2026 के दौरान Mercedes-Benz, BMW और Audi जैसे प्रमुख ब्रांडों ने बार-बार कीमतों में इजाफा किया है, जिसकी मुख्य वजह बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट और रुपये की कमजोरी है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
इस पूरी तेजी का मुख्य कारण यूरो के मुकाबले रुपये में आया उतार-चढ़ाव है। लग्जरी कार कंपनियां मुख्य रूप से 'कंप्लीटली नॉक डाउन' (CKD) किट्स के इंपोर्ट पर निर्भर हैं। चूंकि ये पुर्जे यूरोपीय बाजारों से आते हैं, इसलिए रुपये की गिरावट सीधे तौर पर प्रोडक्शन कॉस्ट को बढ़ा देती है। अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कंपनियां अब इस अतिरिक्त बोझ को ग्राहकों पर डाल रही हैं।
पॉपुलर मॉडल्स पर असर
इस प्राइस हाइक का असर लोकप्रिय मॉडल्स पर साफ दिख रहा है। Mercedes-Benz GLA 200 की कीमत अब टैक्स कटौती से पहले के स्तर से भी लगभग ₹30,000 ज्यादा हो गई है। वहीं, BMW X3 xDrive20d M Sport पर मिलने वाली ₹5.2 लाख की शुरुआती बचत अब लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है। Audi India ने भी इस साल दो बार कीमतें बढ़ाई हैं।
डिमांड पर दबाव
मास-मार्केट प्लेयर्स के विपरीत, लग्जरी कार ब्रांड्स का वॉल्यूम कम होता है, जिसके चलते वे स्थानीय स्तर पर पूरी मैन्युफैक्चरिंग (डीप लोकलाइजेशन) करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, पोस्ट-पेंडेमिक ग्रोथ के बाद अब बाजार में कंज्यूमर डिमांड ठंडी पड़ती दिख रही है। Mercedes-Benz ने अक्टूबर में और कीमतों में बदलाव के संकेत दिए हैं, जबकि BMW भी भविष्य में बढ़ोतरी के संकेत दे रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अब टैक्स-एडवांटेज का दौर खत्म हो चुका है, और निवेशकों को अब इन कंपनियों के सेल्स वॉल्यूम और मार्जिन पर कड़ी नजर रखनी होगी।
