Luxury Car Prices: लग्जरी कारों के महंगे होने से निवेशकों की चिंता! GST में मिली राहत का असर हुआ बेअसर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Luxury Car Prices: लग्जरी कारों के महंगे होने से निवेशकों की चिंता! GST में मिली राहत का असर हुआ बेअसर

Mercedes-Benz, BMW और Audi जैसी लग्जरी कार कंपनियों ने इस साल कई बार कीमतों में इजाफा किया है। इससे सरकार द्वारा GST में दी गई राहत का करीब दो-तिहाई हिस्सा खत्म हो गया है, जिससे प्रीमियम सेगमेंट पर दबाव बढ़ गया है।

भारत में लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों ने साल 2026 में लगातार अपने रिटेल दाम बढ़ाए हैं, जिससे पिछले साल मिली टैक्स छूट का फायदा पूरी तरह से खत्म हो गया है। जब सरकार ने GST 2.0 लागू किया था, तो प्रीमियम वाहनों पर टैक्स का बोझ 50% से घटाकर 40% कर दिया गया था, जिससे ग्राहकों को शुरुआती दौर में लगभग 7.5% की राहत मिली थी। हालांकि, लेटेस्ट इंडस्ट्री डेटा यह बताता है कि इस राहत का करीब 5% हिस्सा कंपनियों ने बार-बार कीमतें बढ़ाकर खुद में सोख लिया है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

इस महंगाई के पीछे मुख्य वजह लॉजिस्टिक्स खर्च में बढ़ोत्तरी और रुपये में आ रही गिरावट है। मास-मार्केट ऑटोमोबाइल कंपनियों के उलट, लग्जरी सेगमेंट अभी भी काफी हद तक आयातित पुर्जों (imported components) पर निर्भर है। जब रुपया डॉलर या यूरो के मुकाबले गिरता है, तो इन पुर्जों की लागत बढ़ जाती है। कंपनियों के पास इन बढ़े हुए खर्चों को खुद वहन करने की क्षमता कम होती है, इसलिए वे इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल रही हैं।

सेल्स ग्रोथ की सुस्त रफ्तार

निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि लग्जरी कारों की सेल्स ग्रोथ, पैसेंजर व्हीकल मार्केट की तुलना में धीमी है। साल 2026 में सेल्स का आंकड़ा करीब 58,000 यूनिट्स रहने का अनुमान है, जो साल-दर-साल आधार पर 11% की बढ़ोतरी है। वहीं, ब्रॉडर पैसेंजर व्हीकल मार्केट में यह ग्रोथ 13% से 14% रहने की उम्मीद है। यह अंतर दिखाता है कि प्रीमियम ग्राहक बढ़ती कीमतों के प्रति कितने संवेदनशील हैं।

आगे की राह

Volvo Cars India जैसी कंपनियां भी संकेत दे रही हैं कि अगर करेंसी और इनपुट कॉस्ट का दबाव बना रहा, तो आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल, निवेशकों की नजर सेल्स वॉल्यूम और करेंसी स्टेबिलिटी पर टिकी है। क्या लग्जरी सेगमेंट अपनी मौजूदा ग्रोथ को बरकरार रख पाएगा या बार-बार बढ़ती कीमतें डिमांड को प्रभावित करेंगी, यह देखना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.