TVS Motor, Bajaj Auto और Hero MotoCorp ने भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार के **60%** से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया है। बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल की पैठ **11%** के पार निकलने के बाद, ये पुरानी कंपनियां अपने बड़े प्रोडक्शन और नेटवर्क के दम पर नए स्टार्टअप्स को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में अब एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां मैन्युफैक्चरिंग स्केल और पुराना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ही सफलता की असली कुंजी साबित हो रहे हैं। साल 2026 के अंत तक, TVS Motor Company, Bajaj Auto और Hero MotoCorp जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने अपनी पकड़ मजबूत करते हुए कुल मार्केट शेयर का 60% से अधिक हिस्सा हासिल कर लिया है।
प्रोडक्शन बढ़ाने की होड़
ये पुरानी दिग्गज कंपनियां मांग को पूरा करने के लिए अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने में जुटी हैं। TVS, Bajaj और Hero का लक्ष्य FY28 के अंत तक प्रति माह 80,000 यूनिट से ज्यादा बनाने का है। यह सिर्फ स्कूटर बनाने की बात नहीं है, बल्कि अपनी पुरानी डीलर नेटवर्क का इस्तेमाल करके आफ्टर-सेल्स सर्विस और फाइनेंसिंग की वो सुविधा देना है, जिसे नए स्टार्टअप्स के लिए रातों-रात दोहराना बेहद मुश्किल है।
स्टार्टअप्स के लिए चुनौती और Ola Electric का डेटा
सितंबर 2026 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की पैठ कुल सेल्स में 11.6% और स्कूटर सेगमेंट में 24% तक पहुंच गई है, लेकिन इसका फायदा हर किसी को नहीं मिल रहा है। Ola Electric जैसे स्टार्टअप्स लागत प्रबंधन और मार्केट शेयर बनाए रखने के संघर्ष में हैं। Ola Electric ने FY27 की पहली तिमाही में ₹336 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया और उनका ऑपरेटिंग मार्जिन -42.8% रहा। सितंबर 2026 में इनका मार्केट शेयर सिर्फ 6.49% पर सिमट गया।
स्टेबिलिटी की तलाश
कुछ स्टार्टअप्स ने सफलता का रास्ता ढूंढ भी लिया है। Ather Energy ने FY27 की दूसरी तिमाही में ₹1.26 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाकर दिखाया है कि दक्षता (Efficiency) पर ध्यान देकर भीड़भाड़ वाले बाजार में भी मुनाफा कमाया जा सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां तेजी से बढ़ते हुए भी अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को कैसे संभालती हैं। हालांकि दिग्गज कंपनियों के पास इंटरनल कंबशन इंजन बिजनेस से आने वाली नकदी है, लेकिन उन्हें भी मार्जिन बचाने और प्राइस सेंसिटिव ग्राहकों को खुश रखने की चुनौती बनी रहेगी। आने वाली तिमाहियों में प्रोडक्शन की रफ्तार और कमोडिटी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी होगा।
