TVS Motor का दबदबा! पुरानी ऑटो कंपनियों ने EV टू-व्हीलर रेस में स्टार्टअप्स को पछाड़ा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
TVS Motor का दबदबा! पुरानी ऑटो कंपनियों ने EV टू-व्हीलर रेस में स्टार्टअप्स को पछाड़ा
Overview

TVS Motor फरवरी 2026 में भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में लीडर बनकर उभरी है। कंपनी ने **28.9%** मार्केट शेयर हासिल किया, वहीं Ola Electric **3.7%** शेयर के साथ सातवें स्थान पर खिसक गई। Bajaj Auto और Ather Energy जैसी पुरानी कंपनियों ने दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया। यह बदलाव दिखाता है कि कैसे स्थापित निर्माता अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और ब्रांड की ताकत से नए खिलाड़ियों को पीछे छोड़ रहे हैं।

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भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाज़ार में बड़ा उलटफेर!

यह खबर बताती है कि कैसे पुरानी और स्थापित ऑटोमोबाइल कंपनियाँ, जो कभी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के लिए जानी जाती थीं, अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में नए स्टार्टअप्स को कड़ी टक्कर दे रही हैं और बाज़ार पर अपना दबदबा बना रही हैं। फरवरी 2026 के आंकड़े इस बदलाव की ओर इशारा करते हैं।

स्थापित कंपनियों का बढ़ता दबदबा

Vahan पोर्टल से मिले फरवरी 2026 के रजिस्ट्रेशन डेटा के अनुसार, TVS Motor ने 29,231 यूनिट्स की बिक्री के साथ बाज़ार पर अपना कब्ज़ा जमाया, जो कि 28.9% की मार्केट हिस्सेदारी है। इसके बाद Bajaj Auto 22,942 यूनिट्स ( 22.7% शेयर) के साथ दूसरे स्थान पर रही, जिसमें Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर का बड़ा योगदान रहा। Ather Energy 18,726 यूनिट्स ( 18.5% शेयर) के साथ तीसरे स्थान पर काबिज हुई, जो कि 450 सीरीज की सफलता का नतीजा है। Hero MotoCorp का Vida ब्रांड 11,356 यूनिट्स ( 11.2% शेयर) के साथ चौथे स्थान पर रहा। यह आंकड़े स्पष्ट दिखाते हैं कि जिनके पास बड़े पैमाने पर उत्पादन (manufacturing) की क्षमता, मजबूत डीलर नेटवर्क और ग्राहकों का गहरा भरोसा है, वे इस हाई-वॉल्यूम इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में बाज़ी मार रहे हैं। कुल मिलाकर, भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर मजबूती दिखा रहा है, और 2026 में 6-8% तक की ग्रोथ की उम्मीद है, जो इन कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है।

Ola Electric के मार्केट शेयर में भारी गिरावट

एक समय इस सेगमेंट में अग्रणी रहने वाली Ola Electric की मार्केट हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 3.7% रह गई, जिसके तहत केवल 3,783 यूनिट्स का रजिस्ट्रेशन हुआ। यह इसे सातवें स्थान पर ले आया है। 2023 और 2024 की शुरुआत में अपनी मजबूत पकड़ के मुकाबले यह एक बड़ी गिरावट है। कंपनी के वित्तीय नतीजे भी इसकी मुश्किलों को दर्शाते हैं। इसका पिछला बारह महीनों का P/E रेश्यो करीब -5.04 से -6.02 के बीच रहा है, जो यह बताता है कि कंपनी अभी भी नुकसान में चल रही है। Ola Electric का एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹134.35 बिलियन है, लेकिन नेगेटिव P/E और ऐतिहासिक रूप से 48.7% की बिक्री में गिरावट, इसके परिचालन (operations) में आ रही बड़ी बाधाओं की ओर इशारा करती है। यह बड़ा बदलाव यह बताता है कि Ola की रणनीति बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पुरानी कंपनियों की बढ़ती क्षमताओं का मुकाबला करने में शायद पिछड़ रही है।

वैल्यूएशन पर सवालिया निशान

TVS Motor की बाज़ार में लीडरशिप के बावजूद, इसके वैल्यूएशन पर सवाल खड़े होते हैं। यह लगभग 60-67x के ऊंचे P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जिसका मतलब है कि शेयर की कीमत में भविष्य की लगभग सारी ग्रोथ पहले से ही शामिल है। ऐसे में, अगर ग्रोथ धीमी पड़ती है तो इसमें बड़ी गिरावट आ सकती है। यह वैल्यूएशन Bajaj Auto (लगभग 31x P/E) और Hero MotoCorp (लगभग 23x P/E) जैसे अपने प्रतिस्पर्धियों से काफी ज़्यादा है। Ather Energy, जो मार्केट शेयर में मजबूत है, घाटे में चल रही है, जिसका अंदाजा इसके नेगेटिव P/E रेश्यो (-31x से -41x) से लगाया जा सकता है। इसी तरह, Ola Electric का लगातार नेगेटिव P/E रेश्यो यह बताता है कि कड़े मुकाबले और उत्पादन की मुश्किलों के बीच यह लाभप्रदता (profitability) हासिल करने के लिए जूझ रही है। Hero MotoCorp, जिसने अपना Vida EV ब्रांड लॉन्च किया है और जिसका P/E ठीक-ठाक है, पिछले पांच सालों में बिक्री में कमजोर ग्रोथ दिखा रहा है, जो इसकी ओवरऑल मार्केट डायनामिज्म पर सवाल खड़े करता है।

आगे का रास्ता और चुनौतियाँ

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में 2026 में सरकारी नीतियों और मज़बूत उपभोक्ता मांग के कारण लगातार ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट को कुछ खास चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इनमें चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, ऊंची शुरुआती कीमतें और FAME-II जैसी सब्सिडी का मार्च 2026 में खत्म होना शामिल है। 2027 से CAFE जैसे कड़े रेगुलेटरी नियम आने से निर्माताओं पर कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे मार्जिन पर दबाव आ सकता है। यह ट्रेंड बताता है कि बाज़ार में वो कंपनियाँ बेहतर स्थिति में होंगी जिनके पास बड़ा वित्तीय बल (financial depth) और परिचालन पैमाना (operational scale) है, बजाय उन नए खिलाड़ियों के जिनके पास सीमित पूंजी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.