रेवेन्यू और मुनाफे में जोरदार उछाल
कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि यह शानदार नतीजे नए कार की बिक्री में 10.6% की बढ़ोतरी और आफ्टरसेल्स (Aftersales) रेवेन्यू में 13.1% की जबरदस्त उछाल की वजह से आए हैं। इस दोहरी बढ़त ने कंपनी के ग्रॉस प्रॉफिट (Gross Profit) और EBITDA को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाया है। रिपोर्टेड रेवेन्यू (Reported Revenue) भी 12.6% बढ़कर ₹1,345 करोड़ रहा।
वित्तीय तस्वीर: अनुशासन और रिकवरी का संगम
कंपनी ने ₹14 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जो एक बड़ी रिकवरी दिखाता है। वहीं, कैश प्रॉफिट ₹34 करोड़ रहा, जो पिछले सात तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। इससे पता चलता है कि कंपनी के मुनाफे की क्वालिटी (Quality of Profits) भी सुधरी है। मैनेजमेंट ने वर्किंग कैपिटल (Working Capital) मैनेजमेंट में सुधार की बात कही है। FY26 के पहले नौ महीनों में ₹265 करोड़ से ज्यादा का नेट कैश फ्लो (Net Cash Flow) ऑपरेटिंग एक्टिविटीज (Operating Activities) से जनरेट हुआ है और इन्वेंटरी डेज़ (Inventory Days) घटकर 31 रह गए हैं। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) ₹50 करोड़ पर सीमित रहा, जो आक्रामक विस्तार के बजाय ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस को दिखाता है।
कहानी के पीछे: मार्केट शिफ्ट्स और ब्रांड डायनामिक्स
Landmark Cars की इस कामयाबी के पीछे कई वजहें हैं। कंपनी ने अपने OEM (Original Equipment Manufacturer) पोर्टफोलियो में विविधता लाई है, जिसमें Mahindra & Mahindra, Kia, MG, और BYD जैसे ब्रांड्स शामिल हैं। BYD की वॉल्यूम ग्रोथ 2025 में लगभग 80% रही, और Mahindra के नए मॉडल्स को अच्छी बुकिंग मिल रही हैं। भारत में प्रीमियम और लग्जरी गाड़ियों की बढ़ती डिमांड, खासकर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के कारण, एक बड़ा बूस्ट दे रही है। Landmark Cars का आधे से ज्यादा वॉल्यूम इन्हीं सेगमेंट्स से आता है। कंपनी का आफ्टरसेल्स बिजनेस, जो एक स्थिर रेवेन्यू स्ट्रीम है, उसने भी रिकॉर्ड तोड़ा है, जो बड़े सर्विसबल व्हीकल पॉपुलेशन (Serviceable Vehicle Population) का फायदा दिखाता है।
हालांकि, कंपनी को पहले मार्जिन प्रेशर (Margin Pressure) का सामना करना पड़ा है और Q2 FY26 का प्रदर्शन भी चुनौतीपूर्ण रहा था। नए आउटलेट्स के इंटीग्रेशन (Integration) से भी शुरुआत में मार्जिन पर असर पड़ा था। Mercedes-Benz की बिक्री के लिए एजेंसी मॉडल (Agency Model) में शिफ्ट होना भी एक स्ट्रैटेजिक मूव है, जिसका असर रेवेन्यू रिकॉग्निशन (Revenue Recognition) पर पड़ेगा।
आगे का रास्ता: ग्रोथ की तैयारी, पर सतर्कता जरूरी
Landmark Cars भविष्य को लेकर उत्साहित है। OEM पार्टनर्स की ओर से Mercedes-Benz V Class और CLA, और Renault Duster जैसे नए मॉडल्स की लॉन्चिंग की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि उसका डाइवर्सिफाइड OEM बेस, बढ़ता आफ्टरसेल्स बिजनेस, और ग्रोथ व फाइनेंशियल डिसिप्लिन (Financial Discipline) का बैलेंस उसे अच्छी पोजीशन में रखता है। प्रीमियम, लग्जरी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट का मीडियम से लॉन्ग-टर्म आउटलुक (Outlook) मजबूत है। निवेशकों को कंपनी की ग्रोथ रेट्स को बनाए रखने और प्रॉफिट मार्जिन को बेहतर बनाने की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। पिछले कुछ एनालिस्ट रिपोर्ट्स में हाई डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) और इंटरेस्ट कवरेज (Interest Coverage) जैसी चिंताएं जताई गई थीं, हालांकि पॉजिटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) डेट मैनेजमेंट पर फोकस को दिखाता है। नए मॉडल्स की लॉन्चिंग और आफ्टरसेल्स नेटवर्क का विस्तार प्रमुख परफॉरमेंस इंडिकेटर्स (Performance Indicators) रहेंगे।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
भारतीय लग्जरी और प्रीमियम ऑटोमोटिव मार्केट, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। Mercedes-Benz, BMW, Audi जैसे OEMs मजबूत बिक्री रिपोर्ट कर रहे हैं। Landmark Cars कई प्रमुख प्लेयर्स के साथ पार्टनरशिप करके इस ट्रेंड का फायदा उठाने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार है। ऑटो रिटेल स्पेस में अन्य डीलरशिप चेन्स जैसे कॉम्पिटिटर्स (Competitors) भी समान मार्केट डायनामिक्स (Market Dynamics) का लाभ उठाना चाहते हैं। हालांकि, Landmark Cars का विभिन्न प्रीमियम और लग्जरी ब्रांड्स में डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो, साथ ही इसका महत्वपूर्ण आफ्टरसेल्स रेवेन्यू स्ट्रीम, इसे एक कॉम्पिटिटिव एज (Competitive Edge) देता है।
