Auto Sector: ग्लोबल मार्केट पर नजर जमाएं ऑटो कंपनियां, H.D. Kumaraswamy ने दिए बड़े निर्देश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Auto Sector: ग्लोबल मार्केट पर नजर जमाएं ऑटो कंपनियां, H.D. Kumaraswamy ने दिए बड़े निर्देश

केंद्रीय मंत्री H.D. Kumaraswamy ने भारतीय ऑटो सेक्टर को घरेलू बाजार के भरोसे न रहकर ग्लोबल एक्सपोर्ट पर ध्यान देने की सलाह दी है। FY2025-26 में **2.97 करोड़** गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री के बाद अब कंपनियों को बढ़ती इनपुट कॉस्ट और अंतरराष्ट्रीय नियमों की चुनौतियों से पार पाना होगा।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री H.D. Kumaraswamy ने भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए नया एजेंडा सेट कर दिया है। ACMA के 66वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि भारत को ग्लोबल हब बनाने के लिए कंपनियों को केवल घरेलू सेल्स वॉल्यूम पर निर्भर रहने के बजाय हाई-वैल्यू रिसर्च और टेक्नोलॉजी पर ध्यान देना होगा।

सरकारी मदद और निवेश

सरकार इस बदलाव को गति देने के लिए पीएलआई (PLI) स्कीम के जरिए पूरा सपोर्ट दे रही है। 30 जून 2026 तक, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट पीएलआई के लाभार्थियों ने लोकल सप्लाई चेन बनाने के लिए ₹45,477 करोड़ से ज्यादा का निवेश करने का वादा किया है। इसके अलावा, PM E-DRIVE स्कीम के तहत ₹11,900 करोड़ का आउटले तय किया गया है, जो मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स और पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसों को बूस्ट देगा।

रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद चुनौतियां

बीता फाइनेंशियल ईयर ऑटो सेक्टर के लिए ऐतिहासिक रहा, जिसमें रिटेल सेल्स 2.97 करोड़ यूनिट रही, जो पिछले साल के मुकाबले 13.3% ज्यादा है। लेकिन बड़ी चुनौती है प्रॉफिटेबिलिटी और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट के बीच संतुलन बनाए रखना।

निवेशकों को इनपुट कॉस्ट के दबाव पर भी नजर रखनी होगी। 1 सितंबर 2026 को Tata Motors ने रॉ मटीरियल की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए अपने मॉडल्स की कीमतों में ₹25,000 तक का इजाफा किया है। इस तरह का महंगाई का दबाव अगर कंपनियों की दक्षता में नहीं बदला, तो यह उनके मार्जिन को सिकोड़ सकता है।

ग्लोबल एक्सपोर्ट की राह में बाधाएं

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने के लिए केवल कम लागत काफी नहीं है। यूरोपीय संघ (EU) का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे कड़े नियम अब एक बड़ी चुनौती हैं, जिसके लिए कंपनियों को ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश करना होगा। साथ ही, इलेक्ट्रिक मोटर्स के लिए जरूरी रेयर-अर्थ मैग्नेट की सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव भी एक बड़ा रिस्क बना हुआ है। अब देखना यह है कि क्या पीएलआई के तहत हो रहा भारी निवेश लोकल पार्ट्स के उत्पादन को तेजी से बढ़ा पाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.