ऑटो सेक्टर पर मार्जिन का दबाव, Kotak ने इन 3 कंपनियों पर जताया भरोसा

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AuthorNeha Patil|Published at:
ऑटो सेक्टर पर मार्जिन का दबाव, Kotak ने इन 3 कंपनियों पर जताया भरोसा

Q1 FY27 में भारतीय ऑटो सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ **26%** रही, लेकिन कमोडिटी की बढ़ती कीमतों ने मुनाफे पर दबाव डाला है। इन चुनौतियों के बावजूद, Kotak Institutional Equities ने Mahindra & Mahindra, Eicher Motors और TVS Motor को अपनी पसंदीदा सूची में रखा है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या मजबूत मांग इन कंपनियों को बढ़ती लागतों को संभालने में मदद कर पाएगी।

ऑटो सेक्टर की दोहरी मार: वॉल्यूम बढ़ा, मुनाफा घटा

भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां रिकॉर्ड बिक्री हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों का मुनाफा कम होता दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में ऑटो ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) की वॉल्यूम ग्रोथ में 26% का शानदार इजाफा देखने को मिला। इस उछाल का मुख्य कारण GST 2.0 का असर रहा, जिसने पैसेंजर व्हीकल्स, टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री को बढ़ावा दिया।

मार्जिन पर क्यों पड़ा दबाव?

हालांकि, वॉल्यूम में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा मुनाफे के तौर पर कंपनियों को नहीं मिला। नतीजों के अनुसार, OEMs के एग्रीगेट प्रॉफिट मार्जिन में 210 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई और यह 13.1% पर आ गया। इस मार्जिन प्रेशर की सबसे बड़ी वजह कच्चे माल, खासकर रबर और एल्युमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं। हालांकि कुछ कमोडिटी की कीमतें हाल की ऊंचाई से नीचे आई हैं, लेकिन रबर की लगातार बढ़ी हुई कीमत इस सेक्टर के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।

Kotak की पसंद: M&M, Eicher, TVS

इस मुश्किल माहौल के बीच, Kotak Institutional Equities के एनालिस्ट्स ने कुछ चुनिंदा कंपनियों पर भरोसा जताया है। उन्होंने Mahindra & Mahindra, Eicher Motors और TVS Motor को अपनी पसंदीदा सूची में रखा है। इन कंपनियों को बाकी सेक्टर की तुलना में मौजूदा लागत दबाव से निपटने में बेहतर स्थिति में माना जा रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि जहां पूरा ऑटो सेक्टर वोलेटिलिटी से जूझ रहा है, वहीं ये चुनिंदा स्टॉक्स मार्जिन में हो रही कमी के खिलाफ अधिक लचीलापन दिखाते हैं।

टायर कंपनियों की मुश्किल और आगे का अनुमान

यह मार्जिन प्रेशर पूरे ऑटो स्पेस में एक जैसा नहीं है। टायर बनाने वाली कंपनियों को रबर की कीमतों में आई 30% की बढ़ोतरी के कारण ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, वाहन निर्माता कंपनियां भी लागत दबाव झेल रही हैं, लेकिन उन्होंने प्रोडक्ट मिक्स और प्राइसिंग में बदलाव करके इसे कुछ हद तक मैनेज करने की कोशिश की है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि ग्रॉस मार्जिन पर यह दबाव चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही तक बना रह सकता है, जिसके बाद इसमें सुधार की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

निवेशकों के लिए, कच्चे माल की कीमतों, खासकर रबर की कीमतों का उतार-चढ़ाव देखना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि अक्टूबर में पीक टैपिंग सीजन शुरू होने के बाद रबर की कीमतों में नरमी की उम्मीद है, लेकिन नियर-टर्म में प्रॉफिट मार्जिन कमोडिटी की कीमतों के प्रति संवेदनशील रहेंगे। मांग की स्थिरता, जो हाल के पॉलिसी बदलावों के कारण मजबूत बनी हुई है, वह भी महत्वपूर्ण साबित होगी। निवेशकों को यह भी देखना होगा कि ये कंपनियां संभावित मूल्य वृद्धि को वॉल्यूम ग्रोथ बनाए रखने की जरूरत के साथ कैसे संतुलित करती हैं, खासकर ऐसे माहौल में जहां ग्राहक वाहन की कीमतों के प्रति संवेदनशील हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.