कर्नूल के एक उपभोक्ता अदालत ने Kia India और उसके डीलर को एक Sonet डीजल SUV के लिए ग्राहक को पूरा रिफंड देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस तकनीकी खामी को 'सर्विस में कमी' (deficiency in service) माना है।
कर्नूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Kia India और उसके डीलर, MG Brothers के खिलाफ एक सख्त फैसला सुनाया है। मामला Kia Sonet डीजल SUV में आ रही बार-बार की तकनीकी खराबी से जुड़ा है। कोर्ट ने कंपनी को वाहन की एक्स-शोरूम कीमत यानी ₹10,99,890 का पूरा रिफंड करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, कंपनी को 25 फरवरी, 2026 से इस राशि पर 9% सालाना ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹1 लाख और कानूनी खर्च के रूप में ₹10,000 का भुगतान करना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद डीजल इंजनों के उत्सर्जन को कम करने वाली तकनीक, 'डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर' (DPF) से जुड़ा है। वाहन मालिक ने बार-बार DPF की समस्याओं की शिकायत की थी, जिसे वारंटी अवधि के दौरान ठीक नहीं किया जा सका। उपभोक्ता आयोग ने माना कि कंपनी स्थायी तकनीकी समाधान प्रदान करने में विफल रही है, जो सीधे तौर पर 'सर्विस में कमी' को दर्शाता है।
कोर्ट ने कहा कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि यह खराबी केवल ग्राहक की ड्राइविंग आदतों के कारण हुई थी। इस मामले में सर्विस नेटवर्क की विफलता प्रमुख रही।
ऑटो सेक्टर के लिए सबक
भारत की घनी ट्रैफ़िक परिस्थितियों में DPF तकनीक अक्सर चुनौतीपूर्ण साबित होती है, क्योंकि इसे साफ करने के लिए लंबी दूरी और हाई-स्पीड ड्राइविंग की जरूरत होती है। हालांकि यह एक व्यक्तिगत मामला है, लेकिन यह ऑटो कंपनियों के लिए आफ्टर-सेल्स सर्विस की मजबूती और तकनीकी दावों के बीच के संतुलन को लेकर एक चेतावनी है। निवेशकों के लिए, ऐसी कानूनी मिसालें यह समझने में महत्वपूर्ण हैं कि कैसे कंपनियां तकनीकी खराबी और वारंटी दावों को संभालती हैं, क्योंकि इसका असर लंबे समय में ब्रांड की साख और ग्राहकों के भरोसे पर पड़ता है।
