कर्नाटक के उद्योग मंत्री M.B. Patil ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें Honda Motor के राज्य से बाहर जाने की बात कही जा रही थी। कंपनी अपनी मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश बढ़ा रही है।
क्या है सच?
हाल ही में केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री H.D. Kumaraswamy द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अटकलें तेज हो गई थीं कि Honda Motor कर्नाटक से अपना कामकाज समेट सकती है। हालांकि, कर्नाटक के उद्योग मंत्री M.B. Patil ने इन सभी दावों को आधारहीन बताया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनी राज्य की औद्योगिक प्रगति में एक प्रमुख स्तंभ बनी हुई है और वहां से बाहर जाने का कोई औपचारिक संकेत नहीं मिला है।
निवेश और विस्तार की कहानी
Honda का कोलार जिले के नरसपुरा में एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है, जो 2013 से चल रहा है। यहां 7,800 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं और रोजाना 10,000 टू-व्हीलर्स का प्रोडक्शन होता है। इसके अलावा, कंपनी अपनी लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी बढ़ा रही है। सितंबर 2026 में Honda Cars India ने दोड्डबल्लापुरा में स्पेयर पार्ट्स वेयरहाउस के विस्तार के लिए ₹450 करोड़ के निवेश का ऐलान किया है, जिससे इसका दायरा 1,40,000 वर्ग मीटर तक पहुंच जाएगा।
EV मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा बदलाव
राज्य से बाहर जाने की खबर भले ही गलत हो, लेकिन कंपनी की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) रणनीति में बदलाव जरूर आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Honda Motorcycle & Scooter India (HMSI) ने नरसपुरा में अपनी प्रस्तावित ₹600 करोड़ वाली डेडिकेटेड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर फैक्ट्री के प्लान को होल्ड कर दिया है।
बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुस्त मांग के चलते कंपनी अब नया प्लांट लगाने के बजाय मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का ही इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। इससे कंपनी की भारी-भरकम शुरुआती पूंजी (Capital Expenditure) बच सकेगी और वह मार्केट के रिस्क को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएगी।
