कर्नाटक के Mandya में प्रस्तावित EV और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट टेस्टिंग फैसिलिटी प्रोजेक्ट पिछले **10 महीने** से जमीन आवंटन के कारण अटका हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी इस विवाद ने औद्योगिक विकास की रफ्तार को धीमा कर दिया है।
प्रोजेक्ट में क्यों हो रही देरी?
Automotive Research Association of India (ARAI) द्वारा प्रस्तावित इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का काम जमीन के आवंटन के चलते ठप पड़ा है। यह मामला न केवल प्रशासनिक है, बल्कि इसमें अब राजनीतिक तनातनी भी साफ नजर आ रही है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री HD Kumaraswamy और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस चल रही है।
सरकार के बीच टकराव
हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री D.K. Shivakumar ने केंद्रीय मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार जमीन की पहचान कर ले, तो राज्य प्रशासन उसे अधिग्रहित करने की प्रक्रिया को तुरंत शुरू कर देगा। दूसरी ओर, केंद्र का मानना है कि जमीन न मिलना राज्य के औद्योगिक विकास के लिए एक बड़ी बाधा है।
क्यों अहम है यह हब?
- R&D सपोर्ट: ऑटोमोबाइल कंपनियों को नई गाड़ियों की टेस्टिंग और टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी स्टैंडर्ड्स के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
- रोजगार के अवसर: इस प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर हाई-स्किल नौकरियों के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद थी।
- निवेश का जोखिम: देश के अन्य राज्य भी ऐसी परियोजनाओं को खींचने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, ऐसे में कर्नाटक के लिए इस प्रोजेक्ट का समय पर शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण है।
निवेशकों और ऑटो सेक्टर के जानकारों की नजर अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है। यदि जमीन विवाद का हल जल्द नहीं निकलता, तो इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट होने का जोखिम भी बना हुआ है।
