जम्मू और कश्मीर (J&K) ने NITI Aayog इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2024 में 36 में से 34वां स्थान हासिल करने के बाद अपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी रणनीति में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इस सुधार के तहत, सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और EV अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई पॉलिसी का मसौदा तैयार कर रही है।
क्यों हो रहा है EV पॉलिसी में बदलाव?
NITI Aayog के हालिया मूल्यांकन में जम्मू-कश्मीर की 34वीं रैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के मामले में काफी सुधार की गुंजाइश है। इसी कमी को पूरा करने के लिए J&K ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने नई EV पॉलिसी पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।
नई पॉलिसी और सब्सिडी में क्या होंगे बदलाव?
नई पॉलिसी में दिल्ली सरकार के मॉडल से प्रेरणा लेने की उम्मीद है, जिसने EV अपनाने के लिए कई प्रोत्साहन दिए हैं। इस प्रस्ताव को फाइनेंस डिपार्टमेंट और फिर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। एक बड़ा फोकस प्राइवेट गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर रहेगा, जिससे इलेक्ट्रिक कारों और दोपहिया वाहनों की मांग बढ़ सकती है।
साल 2019 की J&K ट्रांसपोर्ट सब्सिडी स्कीम में भी बदलाव की तैयारी है। पहले यह स्कीम बिना किसी खास फ्यूल टेक्नोलॉजी पर ध्यान दिए सामान्य सहायता देती थी। अब, नई योजना के तहत सब्सिडी का लाभ केवल क्लीन-फ्यूल वाले वाहनों, जैसे इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और सीएनजी (CNG) को ही मिलेगा। इसका मकसद पुराने पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेड़े को नए और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों से बदलना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का भविष्य
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के प्रयास पहले से ही जारी हैं। फिलहाल, जम्मू-कश्मीर में 295 पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन चालू हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार की PM E-DRIVE स्कीम के तहत 200 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी मिली है। ये बसें जम्मू और श्रीनगर में बराबर संख्या में तैनात की जाएंगी। स्थानीय अधिकारी इलेक्ट्रिक वाटर ट्रांसपोर्ट की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें झेलम नदी और डल झील पर जेट्टी बनाने की योजनाएं शामिल हो सकती हैं।
विकास की राह में चुनौतियां
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि एक स्पष्ट और व्यापक राज्य EV पॉलिसी के अभाव में प्राइवेट निवेश और कंज्यूमर इंसेंटिव्स सीमित रहे हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सेंट्रल डिमांड सब्सिडी के जुलाई 2026 में खत्म होने के बाद, राज्य-स्तरीय सब्सिडी की कमी से उपभोक्ताओं के लिए शुरुआती लागत बढ़ सकती है, जो अपनाने की रफ्तार को धीमा कर सकती है। नई पॉलिसी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितनी प्रभावी वित्तीय प्रोत्साहन दे पाती है, जिससे लागत की बाधाएं दूर हों और प्राइवेट प्लेयर अधिक चार्जिंग नेटवर्क और सर्विस सेंटर स्थापित करने के लिए आकर्षित हों।
